हिन्दी के महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री का
सपना आखिरकार साकार हुआ। निराला निकेतन को ट्रस्ट बनाने की उनकी अंतिम
इच्छा को शुक्रवार को मूर्त रूप दे दिया गया। उनके नाम पर ही इसका नामकरण
हुआ है। इसकी संस्थापक ट्रस्टी बनीं हैं उनकी पत्नी छाया देवी। शुक्रवार की
शाम जिला निबंधन अधिकारी ने उनके आवास पर जाकर निबंधन की सारी कार्यवाही
पूरी की।
जानकारी के मुताबिक सात अप्रैल 2010 को शास्त्री जी के निधन के बाद से ही उनकी पत्नी निराला निकेतन को ट्रस्ट बनाने के लिए प्रत्यनशील रहीं। उनका कहना था कि आचार्यश्री की अंतिम इच्छा निराला निकेतन को ट्रस्ट बनाने की थी, ताकि यह सुरक्षित रह सके। यहां की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हो। विगत डेढ़ वर्ष में कई बार योजना बनी, लेकिन धरातल पर नहीं उतर सकी। आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री ट्रस्ट एक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में निबंधित हुआ है। निबंधन शुल्क मात्र एक हजार रुपये लिया गया है।
ये है चल-अचल संपत्ति : निराला निकेतन 15 कट्ठा अर्थात 65 डिसमिल पर बसा है। 15 सौ स्क्वायर फीट में भवन बना हुआ है। पुस्तकालय में करीब एक हजार पुस्तकें हैं जिनकी कीमत करीब 25 हजार रुपये है। संपत्ति की कुल कीमत 2 करोड़ आंकी गई है। साथ ही आचार्यश्री के निधन के बाद किसी तरह का पुरस्कार प्राप्त होने या रॅायल्टी या धरोहर आदि मिलने पर उस पर जीवनभर उनकी पत्नी का अधिकार होगा।
ट्रस्ट में ये होंगे शामिल : अध्यक्ष छाया देवी के अलावा संरक्षक मंडल में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विवि वर्धा के कुलाधिपति डॉ. नामवर सिंह, अवकाश प्राप्त आइएएस नई दिल्ली अशोक वाजपेई, एडीजीपी बिहार गुप्तेश्वर पाण्डेय, डीएम मुजफ्फरपुर पदेन सदस्य व एमएलसी देवेश चंद्र ठाकुर। इनके अलावा उपाध्यक्ष प्रो. रामप्रवेश सिंह, सचिव डॉ. गोपेश्वर सिंह अध्यक्ष हिंदी विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय, जयमंगल मिश्र कार्यकारी सचिव, डॉ. रश्मि रेखा कोषाध्यक्ष, डॉ. कल्याण कुमार झा सदस्य होंगे।
जानकारी के मुताबिक सात अप्रैल 2010 को शास्त्री जी के निधन के बाद से ही उनकी पत्नी निराला निकेतन को ट्रस्ट बनाने के लिए प्रत्यनशील रहीं। उनका कहना था कि आचार्यश्री की अंतिम इच्छा निराला निकेतन को ट्रस्ट बनाने की थी, ताकि यह सुरक्षित रह सके। यहां की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण हो। विगत डेढ़ वर्ष में कई बार योजना बनी, लेकिन धरातल पर नहीं उतर सकी। आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री ट्रस्ट एक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में निबंधित हुआ है। निबंधन शुल्क मात्र एक हजार रुपये लिया गया है।
ये है चल-अचल संपत्ति : निराला निकेतन 15 कट्ठा अर्थात 65 डिसमिल पर बसा है। 15 सौ स्क्वायर फीट में भवन बना हुआ है। पुस्तकालय में करीब एक हजार पुस्तकें हैं जिनकी कीमत करीब 25 हजार रुपये है। संपत्ति की कुल कीमत 2 करोड़ आंकी गई है। साथ ही आचार्यश्री के निधन के बाद किसी तरह का पुरस्कार प्राप्त होने या रॅायल्टी या धरोहर आदि मिलने पर उस पर जीवनभर उनकी पत्नी का अधिकार होगा।
ट्रस्ट में ये होंगे शामिल : अध्यक्ष छाया देवी के अलावा संरक्षक मंडल में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विवि वर्धा के कुलाधिपति डॉ. नामवर सिंह, अवकाश प्राप्त आइएएस नई दिल्ली अशोक वाजपेई, एडीजीपी बिहार गुप्तेश्वर पाण्डेय, डीएम मुजफ्फरपुर पदेन सदस्य व एमएलसी देवेश चंद्र ठाकुर। इनके अलावा उपाध्यक्ष प्रो. रामप्रवेश सिंह, सचिव डॉ. गोपेश्वर सिंह अध्यक्ष हिंदी विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय, जयमंगल मिश्र कार्यकारी सचिव, डॉ. रश्मि रेखा कोषाध्यक्ष, डॉ. कल्याण कुमार झा सदस्य होंगे।
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