धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों में पली बढ़ी है नवोदित युवा शयारा अंजलि कौल "अदा", अंजलि छोटे परदे पर अभिनय के लिए भी जानी जाती है इसके अलावा गायकी, बैली डांसिंग, डोकुमेंत्री निर्देशन तथा कश्मीरियत के लिए भी काम करती रही है.अभी हाल ही में दिल्ली में एक मुशयारा में शिरकत करने आई अंजलि "अदा" से बात की हमारे दिल्ली ब्यूरो प्रमुख अमित कुमार ने पेश है प्रमुख अंश :- प्रश्न : अंजलि शायरी में आप संघर्ष कर रहीं है इसके अलावा कुछ और करती है आप ? अंजलि अदा : देखिये शेरों -शायरी के अलावा भी बहुत कुछ है जिसमे मैंने योगदान दिया है मैंने ५० से अधिक टीवी सीरियल में काम किया है इनमे प्रमुख है : सरफ़रोश, जज्बा,पिंजरे के पंछी,उमंग टेली फिल्म अमातव, लौट आओ , हम साया इत्यादि. डांसिंग शो भी देश के साथ साथ विदेशों में भी की है. प्रश्न : आपकी शयारी की कोई संग्रह उपलब्ध है ? अंजलि अदा : जी हाँ, सूफी शयारी की किताब "तेरे इश्क में" जो अभी प्रेस में है कुछ ही दिनों बाद ये मार्केट में उपलब्द होगा. प्रश्न : एक प्रशन जो हमारे पाठक भी आप से जानना चाहते होंगे की कश्मीरी पंडित यूवती कैसे उर्दू शेरो -शयारी की तरफ आकर्षित हुई ? अंजलि अदा : देखिये कश्मीर का एक अपना संस्कृति है, एक सूफी आवोहवा है उस कश्मीरियत माहौल ने मुझे शेरों शायरी की तरफ आकर्षित किया. प्रश्न : अभी आपने मशहूर शायर मंजर भोपाली के साथ स्टेज साझा किया है, कैसा रहा मंजर साहब के साथ का अनुभव ? अंजलि अदा : मंजर भोपाली साहब शेरों शायरी की दुनिया के महान शक्शियत है इनके साथ काम करने का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा. मंजर साहब पिछले चालीस साल से शेरों शयारी से आम लोगों का मनरंजन कर रहें हैं तथा शायरी के माध्यम से गंभीर मुद्दे उठाते रहें है. मंजर साहब बहुत ही खुशमिजाज इंसान है उम्मीद करती हूँ की भविष्य में फिर से मंजर साहब के साथ काम करने का मौका मिलेगा. प्रश्न : कुछ ऐसा जो आपने कश्मीर की वादी की शान्ति और संस्कृति को बचाने के लिए किया हो ? अंजलि अदा : मैं kashmiriyat preservation foundation की महासचिव हूँ. हम कोसिस करते हैं की घाटी में रह रहें तथा विश्व के किसी भी कोने में रह रहे कश्मीरी अपनी सभ्यता और संस्कृति से ना कटें. कश्मीर वादी की जो सभ्यता है वो अपने आप में अनोखी है यंहा की संस्कृति किसी धर्म और जाति से ऊपर है इसको आप गंगा जमुनी संस्कृति का नाम दे सकते है. और इसके अलावा हम आपसी सद्भाव के लिए समय समय पर कार्यकर्म आयोजित करते रहते है. प्रश्न : नब्बे के दशक में जब आतंक कश्मीर वादी में पनप रहा था तब घाटी से कश्मीरी पंडित अपने ही घर से आतंकियों द्वारा खदेड़ दिए गए, वो अपने ही देश में शरणार्थी की स्थिति में हैं. लेकिन आप जैसे कुछ परिवार है जो तमाम परेशानी के वाबजूद घाटी में जमे हुए हैं इसके पीछे क्या कारण है ? अंजलि अदा : मैंने अपनी आँखों से वादी में आतंक को पनपते हुए देखा है उस समय मैं स्कूल की छात्रा थी और जंहा तक मैं मानती हूँ इस तरह के किसी भी घटना में आम कश्मीरी का कोई हाथ नहीं था. कुछ लोग जो घाटी को आशान्त देखना चाहते थे उन्होंने इस तरह की घटना को अंजाम दिया, उन्होंने लोगों को डराया धमकाया घर के बाहर पोस्टर चिपकाये लेकिन इस तरह की घटना को हम सिर्फ आतंकी घटना के तौर पर देखते है इस से आम लोगों का कोई लेना देना नहीं था. घाटी के किसी भी घर में आप जाएँ चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय का घर हो उस घर ने कम से कम अपना एक सदस्य जरूर खोया है. आम कश्मीरी पहले भी भाईचारे के साथ रहते थे अब भी है कश्मीरी अमन पसंद होते हैं. हम कश्मीर में अभी तक इस लिए जमे है की हमारी जड़े कश्मीर की वादियों से गहरी जुड़ी है जिसे कोई नहीं हिला सकता. अगर आप अपने जड़ों से जुड़े है तो कोई भी ताकत आपकों आपकी मिटटी से बेदखल नहीं कर सकता. प्रश्न : कश्मीर में जब आतंकवादी घटना अपने चरम पर थी तब आपने क्या अपने कार्यकर्म को घाटी में बंद कर दिया था ? अंजलि अदा : नहीं बिलकुल नहीं जब वादी में आतंकी घटना बढ़ गई और आपसी सद्भव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाने लगा तब मैं बिना किसी डर और झिझक के घाटी में अपने कार्यकर्म करती रही तथा अपने शो के माध्यम से लोगों में शान्ति और सद्भाव का सन्देश देती रही. प्रश्न : कभी अपने पडोसी मुल्क में भी कोई शो आपने किया है ? अंजलि अदा : हाँ मैंने अपने शो के सिलसिले में पडोसी मुल्क पाकिस्तान की यात्रा की है. और मैं आजादी के बाद की पहली कश्मीरी पंडित महिला हूँ जिसने लाहौर की यात्रा किया है तथा अपना शो सूफी संगीत तथा डांस का परफोर्मेंस दिया है . प्रश्न : कुछ अपने पति धनञ्जय कौल के बारे में बताएं ? अंजलि अदा :मेरे पति धनञ्जय कौल सूफी ग़ज़ल तथा शाश्त्रीय संगीत के गायक है. उन्होंने अपनी संगीत की शिक्षा बनारस की मशहूर ठुमरी गायिका श्रीमती निर्मला अरुण( फिल्म अभिनेता गोविंदा की माँ) से ली है. प्रश्न : आप फुर्सत के क्षणों में क्या करती है ? अंजलि अदा :मुझे फुर्सत के क्षणों में संगीत के आलावा होर्से राइडिंग तथा डांसिंग करना अच्छा लगता है. प्रश्न : आप अपने भाषा ज्ञान के बारे में बातयें, किस किस भाषाओं में आप लिख और बोल सकती हैं ? अंजलि अदा : डोगरी और कश्मीरी मेरी अपनी भाषा है इसके अलावा अंगरेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और बंगाली में अच्छी तरह से बोल और लिख सकती हूँ. प्रश्न : चलते चलते कश्मीर में के बारे में कुछ युवाओं को सन्देश देना चाहेंगी ? अंजलि अदा : कश्मीर में अभी बहुत ही अच्छा माहौल है. सरकार अच्छा काम कर रही है. बहुत सारी योजनायें हैं जो कश्मीरी अल्प्शंख्य्कों को ध्यान में रख कर चलाया जा रहा है. कश्मीर अपने पुराने दिनों में लौट रहा है. पर्यटन के हिसाब से अनुकूल माहौल है. यूवाओं से अपील है की कश्मीर की शान्ति में योगदान दें.
Sunday, 24 March 2013
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों में पली बढ़ी है नवोदित युवा शयारा अंजलि कौल "अदा", अंजलि छोटे परदे पर अभिनय के लिए भी जानी जाती है इसके अलावा गायकी, बैली डांसिंग, डोकुमेंत्री निर्देशन तथा कश्मीरियत के लिए भी काम करती रही है.अभी हाल ही में दिल्ली में एक मुशयारा में शिरकत करने आई अंजलि "अदा" से बात की हमारे दिल्ली ब्यूरो प्रमुख अमित कुमार ने पेश है प्रमुख अंश :- प्रश्न : अंजलि शायरी में आप संघर्ष कर रहीं है इसके अलावा कुछ और करती है आप ? अंजलि अदा : देखिये शेरों -शायरी के अलावा भी बहुत कुछ है जिसमे मैंने योगदान दिया है मैंने ५० से अधिक टीवी सीरियल में काम किया है इनमे प्रमुख है : सरफ़रोश, जज्बा,पिंजरे के पंछी,उमंग टेली फिल्म अमातव, लौट आओ , हम साया इत्यादि. डांसिंग शो भी देश के साथ साथ विदेशों में भी की है. प्रश्न : आपकी शयारी की कोई संग्रह उपलब्ध है ? अंजलि अदा : जी हाँ, सूफी शयारी की किताब "तेरे इश्क में" जो अभी प्रेस में है कुछ ही दिनों बाद ये मार्केट में उपलब्द होगा. प्रश्न : एक प्रशन जो हमारे पाठक भी आप से जानना चाहते होंगे की कश्मीरी पंडित यूवती कैसे उर्दू शेरो -शयारी की तरफ आकर्षित हुई ? अंजलि अदा : देखिये कश्मीर का एक अपना संस्कृति है, एक सूफी आवोहवा है उस कश्मीरियत माहौल ने मुझे शेरों शायरी की तरफ आकर्षित किया. प्रश्न : अभी आपने मशहूर शायर मंजर भोपाली के साथ स्टेज साझा किया है, कैसा रहा मंजर साहब के साथ का अनुभव ? अंजलि अदा : मंजर भोपाली साहब शेरों शायरी की दुनिया के महान शक्शियत है इनके साथ काम करने का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा. मंजर साहब पिछले चालीस साल से शेरों शयारी से आम लोगों का मनरंजन कर रहें हैं तथा शायरी के माध्यम से गंभीर मुद्दे उठाते रहें है. मंजर साहब बहुत ही खुशमिजाज इंसान है उम्मीद करती हूँ की भविष्य में फिर से मंजर साहब के साथ काम करने का मौका मिलेगा. प्रश्न : कुछ ऐसा जो आपने कश्मीर की वादी की शान्ति और संस्कृति को बचाने के लिए किया हो ? अंजलि अदा : मैं kashmiriyat preservation foundation की महासचिव हूँ. हम कोसिस करते हैं की घाटी में रह रहें तथा विश्व के किसी भी कोने में रह रहे कश्मीरी अपनी सभ्यता और संस्कृति से ना कटें. कश्मीर वादी की जो सभ्यता है वो अपने आप में अनोखी है यंहा की संस्कृति किसी धर्म और जाति से ऊपर है इसको आप गंगा जमुनी संस्कृति का नाम दे सकते है. और इसके अलावा हम आपसी सद्भाव के लिए समय समय पर कार्यकर्म आयोजित करते रहते है. प्रश्न : नब्बे के दशक में जब आतंक कश्मीर वादी में पनप रहा था तब घाटी से कश्मीरी पंडित अपने ही घर से आतंकियों द्वारा खदेड़ दिए गए, वो अपने ही देश में शरणार्थी की स्थिति में हैं. लेकिन आप जैसे कुछ परिवार है जो तमाम परेशानी के वाबजूद घाटी में जमे हुए हैं इसके पीछे क्या कारण है ? अंजलि अदा : मैंने अपनी आँखों से वादी में आतंक को पनपते हुए देखा है उस समय मैं स्कूल की छात्रा थी और जंहा तक मैं मानती हूँ इस तरह के किसी भी घटना में आम कश्मीरी का कोई हाथ नहीं था. कुछ लोग जो घाटी को आशान्त देखना चाहते थे उन्होंने इस तरह की घटना को अंजाम दिया, उन्होंने लोगों को डराया धमकाया घर के बाहर पोस्टर चिपकाये लेकिन इस तरह की घटना को हम सिर्फ आतंकी घटना के तौर पर देखते है इस से आम लोगों का कोई लेना देना नहीं था. घाटी के किसी भी घर में आप जाएँ चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय का घर हो उस घर ने कम से कम अपना एक सदस्य जरूर खोया है. आम कश्मीरी पहले भी भाईचारे के साथ रहते थे अब भी है कश्मीरी अमन पसंद होते हैं. हम कश्मीर में अभी तक इस लिए जमे है की हमारी जड़े कश्मीर की वादियों से गहरी जुड़ी है जिसे कोई नहीं हिला सकता. अगर आप अपने जड़ों से जुड़े है तो कोई भी ताकत आपकों आपकी मिटटी से बेदखल नहीं कर सकता. प्रश्न : कश्मीर में जब आतंकवादी घटना अपने चरम पर थी तब आपने क्या अपने कार्यकर्म को घाटी में बंद कर दिया था ? अंजलि अदा : नहीं बिलकुल नहीं जब वादी में आतंकी घटना बढ़ गई और आपसी सद्भव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाने लगा तब मैं बिना किसी डर और झिझक के घाटी में अपने कार्यकर्म करती रही तथा अपने शो के माध्यम से लोगों में शान्ति और सद्भाव का सन्देश देती रही. प्रश्न : कभी अपने पडोसी मुल्क में भी कोई शो आपने किया है ? अंजलि अदा : हाँ मैंने अपने शो के सिलसिले में पडोसी मुल्क पाकिस्तान की यात्रा की है. और मैं आजादी के बाद की पहली कश्मीरी पंडित महिला हूँ जिसने लाहौर की यात्रा किया है तथा अपना शो सूफी संगीत तथा डांस का परफोर्मेंस दिया है . प्रश्न : कुछ अपने पति धनञ्जय कौल के बारे में बताएं ? अंजलि अदा :मेरे पति धनञ्जय कौल सूफी ग़ज़ल तथा शाश्त्रीय संगीत के गायक है. उन्होंने अपनी संगीत की शिक्षा बनारस की मशहूर ठुमरी गायिका श्रीमती निर्मला अरुण( फिल्म अभिनेता गोविंदा की माँ) से ली है. प्रश्न : आप फुर्सत के क्षणों में क्या करती है ? अंजलि अदा :मुझे फुर्सत के क्षणों में संगीत के आलावा होर्से राइडिंग तथा डांसिंग करना अच्छा लगता है. प्रश्न : आप अपने भाषा ज्ञान के बारे में बातयें, किस किस भाषाओं में आप लिख और बोल सकती हैं ? अंजलि अदा : डोगरी और कश्मीरी मेरी अपनी भाषा है इसके अलावा अंगरेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और बंगाली में अच्छी तरह से बोल और लिख सकती हूँ. प्रश्न : चलते चलते कश्मीर में के बारे में कुछ युवाओं को सन्देश देना चाहेंगी ? अंजलि अदा : कश्मीर में अभी बहुत ही अच्छा माहौल है. सरकार अच्छा काम कर रही है. बहुत सारी योजनायें हैं जो कश्मीरी अल्प्शंख्य्कों को ध्यान में रख कर चलाया जा रहा है. कश्मीर अपने पुराने दिनों में लौट रहा है. पर्यटन के हिसाब से अनुकूल माहौल है. यूवाओं से अपील है की कश्मीर की शान्ति में योगदान दें.
| दिल्ली के रामलीला में दिखा नितीश लीला |
केशव कुमार : बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की अपनी मांग को दोहराते हुए बिहार के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में अधिकार रैली को संबोधित करते हुए कहा की इसका लाभ सिर्फ बिहार को नहीं बल्कि बिहार जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को भी होगा और सही मायने में देश का समावेशी विकास होगा। नीतीश ने केंद्र पर तंज कसते हुए कहा की बिहार के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता. नीतीश ने केंद्र सरकार को चेताते हुए कहा की दिल्ली में बैठे लोगों को हम बिहारियों की ताकत को पहचानना चाहिए। उन्होंने अपने कार्यकाल में बिहार के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। अगर केंद्र इस समय उसे विशेष दर्जा देता है तो यह विकसित सूबे में शामिल हो सकता है।
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा की पहली बार दिल्ली में इतनी बड़ी तादाद में बिहारियों ने अपने हक को हासिल करने के लिए अपनी ताकत दिखाई है. नीतीश ने बिहार के पिछड़ेपन का खास तौर पर उल्लेख करते हुए कहा की क्या कारन है की कभी विश्व में शिक्षा का केंद्र रहे बिहार के लोग कहीं और जाने पर मजबूर हुए. नीतीश ने कहा कि देश गवाह है बिहार के गौरवशाली इतिहास का. लेकिन आजादी के बाद क्या कारण है कि यह राज्य पिछड़ता गया। लोग शिक्षा और रोजगार के लिए बिहार से बाहर जाने को मजबूर हुए।
नीतीश ने कहा की हम स्वीकार करते हैं की केंद्र सरकार की तरफ से यह सकारात्मक पहल है. यह पूरी तरह हमरे प्रयासों का नतीजा भी है. दरअसल हम यह आवाज लगातार बुलंद करते रहें हैं की विकास में हमारे साथ नाइंसाफी हुई और विशेष राज्य का दर्जा देने के वर्तमान मानक बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को न्याय दिलाने में सक्षम नहीं है. विशेषज्ञों ने भी साफ़ तौर पर माना है की बिहार विकास के तमाम परामीटर पर सबसे निचले पायदान पर है. यह तमाम सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से भी काफी पीछे है. थाल्रुद्ध राज्य और विकास में पिछडापन हमारी मांगों को मजबूती देते हैं. इस अर्थ में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय मानक के तहत भी हमारे साथ विशेष व्यवहार होना चाहिए. नीतीश ने कहा की हम मांग करते हैं की आम बजट में वित्त मंत्री ने जो वादा किया है उसे यथाशीघ्र अमल में लाया जाये.
नीतीश ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा की मुझे मालूम है की दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में भी बिहारी मुश्किलों में रह रहे हैं। लेकिन आप लोग हक के लिए ऐसे ही जुटते रहें। तभी दिल्ली में बैठे लोग इस ताकत को पहचान सकेंगे.
बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा आहूत इस रैली में करीब 20-25 हजार लोगों ने शिरकत की. राजनीतिक विश्लेषक इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहे हैं. लेकिन पार्टी अध्यक्ष शरद यादव इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं. शरद यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा की यह रैली बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करने के लिए बुलाई गई है.
मंच का संचालन वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया. रैली में पार्टी अध्यक्ष शरद यादव, रैली के मुख्या कर्ताधर्ता तथा जद(यू) के बिहार प्रदेशाध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, मंत्री रमई राम, परवीन अमनुलाह, नरेन्द्र सिंह, गौतम सिंह, बिजेंदर कुमार यादव इत्यादि ने शिरकत की.
Monday, 4 March 2013
| कृषि में नई पहल- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अभियान |
| कुछ समय पहले मदुरई जिले के पश्चिमी हिस्से के गांव में तैनात अधिकारियों ने महिला स्वास्थ्य केन्द्र के प्रबंधन की जिम्मेदारी पडोस के रज्जुकर किसान क्लब को सौंपी। मदुरई जिले के मेलूर ब्लॉक के लक्ष्मीपुरम स्थित यह क्लब स्थानीय स्कूल के गरीब बच्चों को हर साल किताबें बांट रहा है। जिले के वैगई विवासाइगलसंघम के किसान क़ृषि संबंधी कार्यक्रम राज्य के विभिन्न हिस्सों में चला रहे हैं। यह सब राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा देश के गांव में चलाए जा रहे अभियान के तहत हुआ। किसान क्लब की अवधारणा नाबार्ड समर्थित है और इसका नारा एक गांव में किसानों का एक क्लब है। इसके तहत प्रगतिशील किसान क्लब के झंडे तले एकत्रित होते हैं। नाबार्ड तीन वर्षों तक इन क्लबों को किसानी के प्रगतिशील तौर-तरीके संबंधी प्रशिक्षण और कृषि संबंधी यात्राओं के लिए राशि उपलब्ध कराता ह .मदुरई जिले के विभिन्न गावों में अभी 170 किसान क्लब काम कर रहे हैं। इन क्लबों में सर्वाधिक सफल किसान हैं उत्थापनीकनूर के किसान। किसान चमेली उगाते हैं। नाबार्ड ने इस क्लब को इंडियन बैंक की साझेदारी में 30 क्लबों में शुमार किया है। एक कदम बढकर इन क्लबों ने एक फेडरेशन बनाया है जिसका नाम है उत्थापनीकनूर फलावर ग्रोअर फेडरेशन। जास्मीन उगाने वाले किसान चाहते हैं कि वे स्वयं अपना बाजार चलाएं। किसान इसके लिए जिला प्रशासन से समर्थन चाहते हैं और सिद्धांत रूप में उन्हें जमीन देने की मंजूरी भी दी गई है नाबार्ड ने मदुरई जिले के अलंगनाल्लानूर के सहकारिता क्षेत्र की प्राथमिक कृषि सहयोग समितियां को इस तरह के क्लब बनाने की मंजूरी दी है। हाल में अलंगनाल्लानूर ब्लॉक में परीपेट्टी किसान क्लब और देवासेरी किसान क्लब के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलाया गया।नाबार्ड के एजीएम श्री शंकर नारायण की राय है कि किसान वैल्यू चैन की बारीकियों को पूरी तरह समझें। इससे उन्हें लाभ होगा और वे किसान क्लब को परिवर्तन एजेंट समझ लाभ की ओर बढ सकते हैं। उन्हें नवीनतम टेक्नॉलोजी के बारे में जानकारी मिल सकेगी, विशेषज्ञों की मदद ले सकेंगे और अतंत: अपने पेशे में निपुण हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि नाबार्ड अपने किसान टेक्नॉलोजी ट्रांसफर फंड के जरिए किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, डेमोप्लॉट का विकास और कृषि ज्ञान के लिए किसानों की यात्राओं जैसे प्रयासों का पूरा खर्च वहन करेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में आम और अमरूद के पौधे लगाने के लिए गम्भीर प्रयास किए जाएंगे। नाबार्ड किसान क्लब के लिए हर तीन साल पर दस हजार रूपये की राशि आबंटित करता है। तीन साल बाद किसान क्लब से जुडे लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे वैसी छोटी-छोटी बचत करें जिनसे रोजाना के खर्च पूरा हो सकें और जरूरत पडने पर एक-दूसरे को ऋण भी दे सके. किसान क्लब कार्यक्रम के तहत किसानों को तीन सालों के लिए वार्षिक रख-रखाव ग्रांट भी मिलता है। किसान तमिलनाडु में प्रशिक्षण के लिए कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं (पुड्डुकोटई, कोयम्बटूर, त्रिची और कांचीपूरम किसान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए चुने गए हैं। किसानों को इस कार्यक्रम के तहत रायटर मार्केट लाइट लिमिटेड के जरिए स्थानीय भाषा में एसएमएस एलर्ट भी हासिल होते हैं। जल प्रबंधन, डेयरी, ओर्गेनिक किसानी तथा सब्जी उगाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों की राय भी मिलती है। क्लब की अवधारणा का लाभ उठाते हुए किसानों तथा क्लबों को नियमित बैठकें करनी चाहिए। प्रत्येक महीने बचत करनी चाहिए ताकि जरूरत पडने पर एक –दूसरे की मदद हो सके। इसके अलावा उन्हें ऋण अदायगी के उचित व्यवहारों का भी प्रचार करना चाहिए तथा अपने उत्पादों के मूल्यवर्धन पर ध्यान देना चाहिए ताकि वे स्वयं अपनी उत्पादक कंपनी खडी कर सकें।
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ग्रामीण विकास मंत्रालय को अगले वित्त वर्ष में 80,194 करोड़ रूपए की राशि
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