Sunday, 27 October 2013

पटना की हुँकार रैली

 पटना स्थित गाँधी मैदान में हुए बम धमाको से सहमा बिहार 
 मुख्यमंत्री नितीश  कुमार ने घटना पर शोक व्यक्त किया                                                                 
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पटना की हुँकार रैली 
 बम धमाकों के बाद भी पटना में मोदी की रैली शुरू हुई. नरेंद्र  मोदी ने बिहार की जनता को  भोजपुरी भाषा में संबोधित किया. भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने 40 मिनट के अपने                                                                               
भाषण में भोजपुरी, मैथिली और मगही का भी उपयोग किया जो राज्य की तीन प्रमुख बोलियां हैं.मोदी के संबोधन से पहले पटना में कई विस्फोट हुए जिसमें से पांच रैली स्थल के पास हुए. इसमें पांच व्यक्तियों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए.

मोदी ने अपने भाषण में विस्फोट का जिक्र नहीं किया लेकिन लोगों से सुरक्षित घर जाने की अपील की. बिहार के मुख्यमंत्री पर चुटकी लेते हुए मोदी ने एक घटना का जिक्र किया, जब वह उनके साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री के समेत टेबल पर बैठे थे और नीतीश खाना नहीं खा रहे थे, असहज थे और इधर उधर देख रहे थे.
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं माजरा समझ गया और उनसे (नीतीश) कहा कि यहां कोई कैमरा नहीं है, आप खाना खा सकते हैं. यह पाखंड की हद है.’’ गुजरात के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह सम्प्रदायिकता के नाम पर लोगों को भ्रमित कर रही है. हिन्दू मुस्लिम एकता की वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि उनमें से कोई नहीं चाहता है कि हम एक दूसरे से लड़े. गरीबी को समाप्त करने के लिए हम सबको मिलकर लडने की जरुरत है.

मोदी ने कहा, बिहार में अब केवल मंगल ही मंगल होगा. मोदी ने नीतीश कुमार पर भाजपा और बिहार के लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया मोदी ने कहा जिन लोगों ने जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया को छोड़ दिया, वे भाजपा को आसानी से छोड़ सकते हैं. कुछ लोगों को छोड़कर बिहार के लोग अवसरवादी नहीं है  उन्होंने कहा कि भले हम उन्हें माफ कर दे लेकिन जिनके पद चिन्हों पर नीतीश चलने का दावा करते आये हैं उनकी आत्मा उन्हें कभी माफ नहीं करेगी.

राहुल को शहजादा संबोधित करने पर कांग्रेस की आपत्ति का जवाब देते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार कहा कि अगर कांग्रेस वंशवाद को छोड़ दे तब वह राहुल गांधी को शहजादा कहना छोड़ देंगे, मोदी ने यहां हुंकार रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ कांग्रेस के मित्र बहुत परेशान है कि मोदी शहजादा क्यों कह रहे हैं.. उन्हें नींद नहीं आती है. लेकिन मैं पूछता हूं कि शहजादा कहने की नौबत क्यों आई. ’’  

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जितना कांग्रेस इस वाक्य से अपमानित महसूस कर रही है, उतना ही लोग राजशाही शासन को नापसंद करते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ अगर कांग्रेस वंशवाद को छोड़ने का वायदा करे, तब मैं शहजादा कहना बंद कर दूंगा.’’   मोदी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने जीवनभर लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया और जेल गए. उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र के चार शत्रु हैं.. राजशाही राजनीति, जातपात, साम्प्रदायिक राजनीति और अवसरवाद.  उन्होंने कहा, ‘‘ यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकतंत्र के ये चारों शत्रु बिहार की राजनीति और संप्रग में मौजूद हैं.’’  बिहार के चंपारण से अंग्रेजों को भगाने का आह्वान करने के संबंध में महात्मा गांधी को याद करते हुए मोदी ने देश से कांग्रेस और बिहार से जदयू को उखाड़ फेंकने का वादा करने का लोगों से आह्वान किया.

मंच में मोदी के अलावा भाजपा के अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह मौजूद थे. रैली में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. मोदी की रैली से कुछ देर पहले सात देसी बम का धमाका हुआ है. इसमें एक शख्‍स की मौत हो गयी है. पहला धमाका स्‍टेशन में और दूसरा धमाका गांधी मैदान में एक और देसी बम विस्‍फोट हुआ. इस धमाके में 50 के घायल होने की खबर है. भाजपा के कई वरीष्ठ नेताओ घायलों को देखने के लिये पीएमसीएच पहुंचे है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम मंच से बलॉस्ट देख रहे थे पूरी घटना बेहद निदंनीय है. पूरे मामले की जांच के बाद हम इस संबंध में विस्तार से बात करेंगे.

यह संयोग ही है कि जिस समय नरेंद्र मोदी हुंकार रैली को संबोधित कर रहे थे , उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मुंगेर योग आश्रम में थे . राजगीर में 28 व 29 अक्तूबर को जदयू का प्रशिक्षण शिविर होना है. इसी दिन नालंदा अंतरराष्ट्रीय विवि की स्थापना के संबंध में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से उनकी मुलाकात हुई.  इस दौरान जब मुख्यमंत्री को पटना बलॉस्ट की खबर मिली तो उन्होंने इस पर जांच के आदेश दिये. नरेंद्र मोदी तीसरी बार पटना आ रहे हैं, लेकिन अब तक यहां उनकी नीतीश कुमार के साथ कभी मुलाकात नहीं हुई.

मोदी ने कहा, ‘‘ देश बदलाव चाहता है.. सभी ओर किचड़ उछाला गया है. लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि जिनता कीचड़ आप उछालेंगे, उतना ही कमल खिलेगा.’’  नीतीश पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ उनके विचार अच्छे नहीं है. अपने चाटुकारों की सलाह, जिन्होंने उनसे कांग्रेस से हाथ मिलाने को कहा क्योंकि उनके प्रधानमंत्री बनने का मौका था, वह सपना देखने लगे.’’  मोदी ने उपस्थित लोगों से पूछा , ‘‘ नीतीश ने न केवल भाजपा को धोखा दिया बल्कि बिहार के लोगों को भी धोखा दिया. यह आपसे विश्वासघात है, क्या ऐसा नहीं है ?’’ लोगों ने ‘हां’ में जवाब दिया.  गुजरात के मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह से उनकी पार्टी ने 1999 में अधिक विधायक होने के बादजूद जंगल राज के खात्मे के लिए कुमार के पूर्व दल समता पार्टी के पक्ष में मुख्यमंत्री पद का बलिदान किया था.

मोदी ने कहा, ‘‘ भाजपा ने मेरे मित्र (नीतीश) के पक्ष में बिहार से जंगल राज के खात्मे के लिए सुशील कुमार मोदी को मुख्यमंत्री बनाये जाने के अवसर को कुर्बान कर दिया था.’’      उन्होंने कहा कि बिहार से पार्टी के कई नेताओं के बार बार के आग्रह के बावजूद वह राजग की एकता और राज्य की भलाई के लिए बिहार से दूर रहे और भाजपा ने हमेशा एकजुटता का प्रयास किया.
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कांग्रेस पर महंगाई का ‘पाप’ करने का आरोप लगाया जिसके कारण लोगों की कमर टूट गई है. उन्होंने कहा कि योजना आयोग ने रिपोर्ट पेश की है जिसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति को 26 रुपये में दो वक्त का खाना मिल सकता है.
 उन्होंने लोगों से पूछा, ‘‘ क्या आपको 26 रुपये में दो वक्त का खाना मिल सकता है ? 26 रुपये में तो कुछ कप चाय भी नहीं खरीदे जा सकते हैं.’’  स्वयं को गरीब परिवार से आने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘ सत्तारुढ पार्टी के लोगों को गरीबी के बारे में पता ही नहीं है. लेकिन मैं जानता हूं.. मैं गरीब परिवार में पैदा हुआ हूं, गरीबी देखी है और जिया है.. मैंने रेलवे स्टेशन पर, ट्रेनों में चाय बेचा है.. जो लोग ट्रेने में चाय बेचते हैं, वे मंत्री से अधिक रेलवे की समस्या समझ सकते हैं.’’

Tuesday, 15 October 2013

 उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख के खिलाफ सीबीआइ ने 2005 में कोल ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर मंगलवार को आपराधिक साजिश व भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किये. प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआइ की टीमों ने मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और भुवनेश्वर में करीब छह जगहों पर सर्च अभियान चलाया. इनमें हैदराबाद और सिकंदराबाद में हिंडालको के दफ्तर और पारेख के आवास शामिल हैं.
सीबीआइ सूत्रों के मुताबिक ओडि़शा में 10 नवंबर, 2005 को आवंटित किये गये तालाबीरा के दो कोयला ब्लॉकों को लेकर आदित्य बिड़ला समूह और समूह की कंपनी हिंडालको के प्रप्रतिनिधि के तौर पर कुमार मंगलम बिड़ला के खिलाफ मामला दर्ज किया. आवंटन के समय पारेख कोयला सचिव थे. उन पर भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के साथ ही आपराधिक षड्यंत्र और अन्य अपराधों के आरोप हैं.
22 को दाखिल करनी है रिपोर्ट : सीबीआइ को हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट में अप्रिय सवालों का सामना करना पड़ा है. कोर्ट ने सीबीआइ को निर्देश दिया था कि वह इस साल दिसंबर तक उन तमाम कंपनियों के खिलाफ जांच पूरी कर ले जिन्हें कोयला ब्लॉक आवंटित किये गये हैं. शीर्ष न्यायालय ने सीबीआइ को यह भी निर्देश दिया कि वह 22 अक्तूबर तक इस मुद्दे पर अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे. 
समूह का पक्ष : समूह ने कोई प्राथमिकी प्राप्त होने व कदाचार के आरोपों से इनकार किया है. हिंडालको ने बंबई स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया है कि उन्होंने कोल ब्लॉक आवंटन मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया है, जहां तक हिंडालको और उनके अध्यक्ष की की बात है, तो यह कंपनियों को कोल आवंटन से जुड़ा एक बड़ा मामला लगता है. उन कंपनियों में से एक होने के नाते हम भी जांच के दायरे में आ रहे हैं.

Saturday, 28 September 2013

samastipur ke inportant numbers
by mukesh samastipuri
Officer's Name Designation Mobile Telephone
Shri Navin Chandra Jha District Magistrate 9473191332 222300 (O), 222301 (R)
Shri chandrika prasad Superintendent of Police 9431822993 222350 (R), 222034 (O)
Shri Saket Kumar Dy. Development Commissioner 9431818367 222264 (R), 221729 (O)
Keshav Kumar Singh Additional Collector 9473191333 222160 (R), 222322 (O)
Mahipal Singh Yadav Additional Collector, Disaster 9431447300 
Dr. Jawahar Prasad Director, NEP 9431240199 
Ranjan Kumar Sinha District Supply Officer 9431425853, 9973024930 
Z. Hasan D.P.R.O 9931652298 
Ramrup Prasad D.T.O 9431430035 
Mod Narayan Jha Dy. Election Officer 9431418239 227327 (O)
Sunil Kumar Sharma D.W.O 
Sunil Kumar D.L.A.O 9431025105 
Santosh Kumar Uttam D.A.O 9431818747 
Pradeep Kumar Asst. Dir. Social Security 9434142811 
Balram Singh G.M. , DIC 9471027022 
Ram Naresh Pandey D.C.O. 9431692615 
Akhilesh Prasad D.P.O, I.C.D.S 9934647126 
Jaychand Pd. Shrivastava D.E.O 9835464187 
Nageshwar Thakur D.H.O 9431818947 
Hemchand Shahu Excise Superintendent 9430523452 
Manoj Kumar Dist. Manager, SFC 9771564176 
Anil Kumar Chaudhary Civil Surgeon 9470003701 
Manoranjan Kumar Dist. Fishries Officer 9431266293 
Ravindra Nath Pathak Dist. Registrar 9234371855 
Mahir Abdul Manir Dist. Treasury Officer 9473106360 


Officer's Name Designation Mobile Telephone
Jay Shankar Mandal Sr. Deputy Collector 9852559460 
Chandan Kumar Sr. Deputy Collector 9798438370 
Mahir Abdul Manir Sr. Deputy Collector 9234378067, 9473106360 
Arvind Kumar Sr. Deputy Collector 9431272459 
Manoj Kumar Sr. Deputy Collector 9934932054 
Shatrughan Kamti Sr. Deputy Collector 9431097523 
Santosh Kumar Jha Sr. Deputy Collector 8986039309 
Manoj Kumar Shahi Sr. Deputy Collector 9470484111 
Upendra Prasad Sr. Deputy Collector 8877263702 
Manoj Kumar Sr. Deputy Collector 9771564176 
Uday Pratap Singh Sr. Deputy Collector 9431660485 
Sunil Kumar Sr. Deputy Collector 9470605991 
Neeraj Kumar Sr. Deputy Collector 9473207582

Sudhir Kumar SDO, Sadar 9473191334 222099
Kundan Kumar SDO, Rosera 9473191337 06275-222244
Varun Kumar Mishra SDO, Dalsinghsarai 9473191336 06278-221303
Jagdish Kumar SDO, Patori 9473191335 06278-234424
Shiv Kumar Shaivya DCLR, Samastipur 9431803899 
Hari Shankar Ram DCLR, Rosera 9431240245 
Rakesh Kumar DCLR, Dalsinghsarai 9431866411 
Ram Dular Ram DCLR, Patori 9939667843 
Smt. Manorama Kumari Executive Magistrate, Samastipur 9473137476 
Rajendra Thakur Executive Magistrate, Patori 9835682472

samastipur ke bdo 

Officer's Name Designation Mobile Telephone
Kumari Kriti BDO, SAMASTIPUR 9431818227 
Khalid Ansari BDO, Warisnagar 9431818566 06274-265186
Shankar Prasad BDO, Khanpur 9431818232 06274-273215
Anju Arun BDO, Kalyanpur 9431818228 06274-284277
Ram Naresh Mandal BDO, Pusa 9431818233 06274-240384
Pramod Kumar BDO, Tajpur 9431818568 06274-282516
Ramdhan Paswan BDO, Morwa 9431818634 06274-248306
Sudhir Kumar BDO, Sarairanjan 9431818231 06274-287251
Sharad Kumar Jha BDO, Rosera 9431818229 06275- 222264
Prakash Mani Vishwas BDO, Shivajee Nagar 9430413743 06275-287753
Surendra Nath Rai BDO, Vibhutipur 9431818242 06275-260325
Din Dayal Prasad BDO, Hasanpur 9431818238 06275-258301
Prabhat Ranjan BDO, Bithan 9431432340 06275-252201
Kumaud Jha BDO, Singhiya 9431818236 06275-285584
Shashi Bhusan BDO, Dalsinghsarai 9431818235 06278-221669
Binod Kumar Chaudhary BDO, Vidyapati Nagar 9431818569 06278-227083
Bhrigu Nath Singh BDO, Ujiarpur 9431818234 06278-288222
Kamlesh Prasad BDO, Patori 9431818230 06278-234505
Smt. Chandrakanta BDO, Mohanpur 9431818570 06278-244147
Shiv Nandan Singh BDO, Mohiuddinagar 9431807417 06278-226691

Officer Category 

Officer's Name Designation Mobile Telephone
Shafi Anwar C.O. , Samastipur 9473044339 
Ramdhani Hazra C.O. , Warisnagar 9279804114 
Ravindra Kumar Chaudhary C.O. , Khanpur 9931448638 
Abhay Pad Das C.O. , Kalyanpur 9431209762 
Smt. Seema Rani C.O. , Pusa 9431240393 
Satya Narayan Kamti C.O. , Tajpur 9631624390 
Md. Sahud C.O. , Morwa 9471049752 
Vijay Kumar Tiwari C.O. , Sarairanjan 9835850220 
Arun Kumar Saxena C.O. , Rosera 9431414270 
Hemant Kumar Das C.O. , Shivajee Nagar 9801520809 
Sunil Kumar Verma C.O. , Vibhutipur 9431492351 
Raghvendra Kumar Singh C.O. , Hasanpur 9835230446 
Satyendra Pd. Sinha C.O. , Bithan 9431222432 
Vinod Kr. Pandey C.O. , Singhiya 9430041978 
Vijay Kr. Tiwari C.O. , Dalsinghsarai 9430978975 
Tripurari Sharan Shrivastava C.O. , Vidyapati Nagar 9835807697 
Arvind Kumar Sinha C.O. , Ujiarpur 9431370116 
Sunil Kumar Verma C.O. , Patori 9431004395 
Anil Kumar C.O. , Mohanpur 9199519141 
Kumari Kanti C.O. , Mohiuddinagar 9835232368

Friday, 20 September 2013

                         प्रधानमंत्री ने सिपत ताप बिजली संयंत्र राष्‍ट्र को समर्पित किया 

प्रधानमंत्री ने एनटीपीसी की 1600 मेगावाट वाली लारा सुपर ताप बिजली परियोजना के पहले चरण की आधारशिला रखी
13वीं पंचवर्षीय योजना में केवल उत्‍कृष्‍ट सूक्ष्‍म टेक्‍नोलॉजी पर आधारित ताप संयंत्र स्‍थापित किए जाएंगेताप बिजली संयंत्रों के लिए अत्‍याधुनिक अल्‍ट्रा सुपर सूक्ष्‍म टेक्‍नोलॉजी विकसित
देश के ऊर्जा उत्‍पादन कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज छत्‍तीसगढ़ में एनटीपीसी का राजीव गांधी सिपत सुपर ताप बिजली संयंत्र राष्‍ट्र को समर्पित किया। डॉ. सिंह ने छत्‍तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित लारा सुपर ताप बिजली परियोजना की रिमोट के जरिये आधारशिला रखी।

इस अवसर पर डॉ. सिंह ने कहा कि 2,980 मेगावाट बिजली उत्‍पादन करने की क्षमता रखने वाला कोयला आधारित बिजली संयंत्र न केवल छत्‍तीसगढ़ की मांग को पूरा करेगा बल्कि आस-पास के राज्‍य जैसे मध्‍यप्रदेश की मांग को भी पूरा करेगा। 11वीं पंचवर्षीय योजना में देश ने करीब 55,000 मेगावाट की रिकॉर्ड विद्युत उत्‍पादन क्षमता हासिल की जो 10वीं पंचवर्षीय योजना की तुलना में दोगुनी है। उन्‍होंने कहा कि 12वीं योजना में सरकार ने 1,18,000 मेगावाट से अधिक विद्युत उत्‍पादन का लक्ष्‍य रखा है।

13,000 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से निर्मित सिपत संयंत्र में एनटीपीसी ने पहली बार सुपर सूक्ष्‍म टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल किया है। विद्युत मंत्रालय सुपर सूक्ष्‍म टेक्‍नोलॉजी का देश में ही निर्माण करने को प्रोत्‍साहन देने के लिए कदम उठा रहा है। यह कार्य सुपर सूक्ष्‍म इकाइयों के निर्माण के लिए भारी मात्रा में टेंडर आमंत्रित कर किया जाएगा। 800 मेगावाट यूनिट का लारा ताप संयंत्र इस प्रकिया की मदद से स्‍थापित किया जाएगा। डॉ. सिंह ने कहा कि 13वीं पंचवर्षीय योजना में केवल सुपर सूक्ष्‍म टेक्‍नोलॉजी पर आधारित ताप संयंत्र स्‍थापित किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अत्‍याधुनिक अल्‍ट्रा सुपर सूक्ष्‍म टेक्‍नोलॉजी देश में विकसित की जा रही है उन्‍होंने इस टेक्‍नोलॉजी को विकसित करने के लिए एनटीपीसी, बीएचईएल और इंन्दिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केन्‍द्र के मिले-जुले प्रयासों की सराहना की।

अपने स्‍वागत भाषण में विद्युत राज्‍य मंत्री श्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने कहा कि बिजली किसी भी देश के विकास का केन्‍द्र है और वर्ष दर वर्ष अतिरिक्‍त उत्‍पादन जुड़ रहा है उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2012-13 में विद्युत उत्‍पादन 23000 मेगावाट था, जो एक रिकॉर्ड है। राष्‍ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) के कार्य की सराहना करते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि यह न केवल देश की बल्कि दुनिया की महारत्‍न है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना एक दूरदर्शी योजना है जो देश के प्रत्‍येक गांव और घर में बिजली पहुंचाएगी। श्री सिंधिया ने कहा कि आने वाले वर्षों में छत्‍तीसगढ़ देश का विद्युत केन्‍द्र बन जाएगा क्‍योंकि सरकार राज्‍य में बिजली क्षेत्र की विभिन्‍न उत्‍पादन, ट्रांसमिशन परियोजनाओं में 62,000 करोड़ रूपये निवेश करने की योजना बना रही है। क्रेडिट : पी आइ बी  नई दिल्ली

Thursday, 29 August 2013


मानव संसाधन विकास मंत्रालय29-अगस्त, 2013 15:52 IST

मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. पल्‍लम राजू ने शिक्षा का अधिकार गीत की शुरूआत की
मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. पल्‍लम राजू ने आज शिक्षा का अधिकार गीत लांच किया। मंत्रालय के सहयोग से राष्‍ट्रीय फिल्‍म विकास निगम ने यह गीत तैयार किया है। इसके बोल जाने-माने गीतकार जावेद अख्‍तर ने लिखे हैं और इसे सोनू निगम और सुनिधि चौहान ने गाया है। इस गीत के वीडियो में देश के विभिन्‍न भागों के बच्‍चों को दिखाया गया है जो शिक्षा के अधिकार के अखिल भारतीय सार को दर्शाते हैं । इसका फिल्‍मांकन सरकारी स्‍कूलों में किया गया है।

इस गीत को अंग्रेजी और 15 क्षेत्रीय भाषाओं में डब किया जायेगा। इसमें असमी, बांग्ला, भोजपुरी, डोगरी, गुजराती, कन्‍नड़, कश्‍मीरी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नागा, उडि़या, पंजाबी, तमिल और तेलुगू भाषा शामिल हैं। इसका मकसद शिक्षा का अधिकार लागू करने के लिए समुदाय और साझेदारो के बीच रचनात्‍मक जागरूकता पैदा करना है। इस अवसर पर मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ.शशि थरूर और गीतकार तथा सांसद श्री जावेद अख्‍तर भी मौजूद थे। डॉ. पल्‍लम राजू ने शिक्षा का अधिकार कानून के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस समारोह में स्‍कूली बच्‍चे मौजूद थे और बाल भवन के बच्‍चों ने कई कार्यक्रम प्रस्‍तुत किये।

मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 में 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्‍चों के लिए 8 वर्ष की प्रारम्भिक शिक्षा को अनिवार्य बनाता है। इस संबंध में मीडिया के अलग–अलग साधनों का इस्‍तेमाल किया गया है और यह गीत शिक्षा का अधिकार संदेश बच्‍चों तक मजेदार तरीके से पहुंचाता है।

डेयरी वि‍कास कार्यक्रम के लि‍ए 703 करोड़ रुपये की योजना

डेयरी वि‍कास कार्यक्रम के लि‍ए 703 करोड़ रुपये की योजना केंद्र सरकार राष्‍ट्रीय कृषि‍ एवं ग्रामीण वि‍कास बैंक(नाबार्ड) के माध्‍यम से राज्‍यों में डेयरी वि‍कास कार्यक्रम के लि‍ए 703 करोड़ रुपये की योजना कार्यान्‍वि‍त कर रही है। पि‍छले तीन वर्षों में इस कार्यक्रम के लि‍ए जारी की गई धनराशि‍ में से बाकी बची धनराशि‍ 150 करोड़ रुपये 12वीं पंचवर्षीय योजना की शेष अवधि‍ में खर्च की जाएगी। यह जानकारी आज कृषि‍ एवं खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग राज्‍य मंत्री डा. चरणदास महंत ने लोकसभा में एक लि‍खि‍त उत्‍तर में दी।

उन्‍होंने बताया कि‍ डेयरी उद्यमि‍ता वि‍कास कार्यक्रम के अंतर्गत दुग्‍ध उत्‍पादों के लिए वांछि‍त उपकरणों की खरीद हेतु 25 प्रति‍शत और अधि‍कतम तीन लाख रुपये की राजकीय सहायता दी जाती है। अजा/अजजा के कि‍सानों के लि‍ए यह धनराशि‍ 37.33 प्रति‍शत और अधि‍कतम चार लाख रुपये है। यह एक ऋण आधारि‍त केंद्रीय योजना है इसलि‍ए राजकीय सहायता ऋण के भुगतान के अंत में दी जाती है।

श्री महंत ने बताया कि‍ पर्वतीय और पि‍छड़े जि‍लों में ‘सघन डेयरी वि‍कास कार्यक्रम’ के नाम से एक और केंद्र प्रायोजि‍त योजना लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत उन जि‍लों को भी सहायता प्रदान की जाती है जि‍न्‍हें शत-प्रति‍शत अनुदान वाले ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के अंतर्गत 50 लाख से कम धनराशि‍ मि‍ल पायी थी।

Sunday, 25 August 2013

clip
अमरीका  स्थित नासा मुख्यालय 

 अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा चंद्रमा के वायुमंडल के बारे में वर्तमान सवालों का जवाब ढूढने के प्रयास के तहत अगले महीने कार के आकार का रोबोटिक उपग्रह भेजने की अंतिम तैयारी में जुटी है.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी चंद्रमा के क्षीण वायुमंडल के आकार एवं संरचना की बेहतर तस्वीर हासिल करने के लिए इस मिशन में लगी है. यह उपग्रह छह सितंबर को भेजा जाएगा जो नासा के वर्जीनिया स्पेश कोस्ट प्रक्षेपण स्थल से पृथ्वी कक्षा से बाहर पहला प्रक्षेपण होगा.
नासा ने कहा कि लूनार एटमॉसफेयर एंड डस्ट एनवायरोनमेंट एक्सप्लोरर नामक यह उपग्रह चंद्रमा के चारो ओर चक्कर लगाएगा और वहां की विस्तृत जानकारी हासिल करेगा.
 क्रेडिट नासा 

Saturday, 10 August 2013

आज दीनाक 10 अगस्त २०१३ को रमेश शर्मा को समस्तीपुर बिहार के लीय press photographer मनोनित कीया जाता है  जो अगले १ वरस के  लिए प्रभावी होगा  संपादक unn news 

Saturday, 13 July 2013

Gender & ICT Award 2005    infolady prize
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Pallitathya Help-Line (a Call Center for the Poor and Under-privileged) project of D.Net won the first prize of the Gender and ICT Awards for 2005. The Award was announced during Association for Women's Rights in Development (AWID) Forum held on 27-30 October 2005 in Bangkok , Thailand . The sponsors of the Award are the Association for Progressive Communications Women's Networking Support Programme (APC WNSP) and Global Knowledge Partnership (GKP). The award was formally handed over during World Summit on the Information Society 2005 held in Tunisia. Dr. Ananya Raihan, Executive Director, D.Net received the ward on behalf of the organization.

The Help-Line deployed women in the community as "Mobile Operator Ladies" who move from door-to-door to enable other women ---mostly housewives--- to ask questions related to livelihood, agriculture, health, and legal rights via a mobile phone, while Help-Desk operators respond to the women's queries with the use of a database-driven software application and the internet. To expand the information database, resource persons from government, non-government organisations, health groups and human rights organisations partnered with D.Net to provide a steady stream of responses to frequently asked questions. With women's economic empowerment as its centrepiece, the Pallitathya Help-Line Centre directly addressed the community's information needs on health, education, livelihood, employment and agriculture, while keeping the beneficiaries' anonymity intact. As mobile operator ladies, women were consciously given a crucial role as "infomediaries," increasing their self-worth, their potential to earn, and their knowledge about various issues. Women help-desk operators also enhanced their knowledge of issues and considerably improved their communication skills. Women who availed of the Help-Line service professed a higher self-assessment and realisation of their potential and worth in society, increased incomes, and increased authority over spending decisions.

Dr Ananya Raihan, Executive Director of D. Net said in describing his organisation's reaction to the award, " I saw the light of inspiration in their eyes. He added, "We would like to go a long way. At this early stage this recognition will facilitate us to work more and achieve the ultimate target".

For its efforts, D.Net's Pallitathya Help-Line Center will received a cash prize of US$8,000.

D.Net has been continuing the help-line with support from IDRC and Manusher Jonno Foundation. From March, 2009 the Help-Line will be expnaded under its new venture  

Credit webmedia
समस्तीपुर महाविद्यालय समस्तीपुर बिहार में आज यू जी सी द्वारा आयोजीत रास्ट्रीय दो दो दिवसीय संगोष्ठी सुरु हुआ'
कार्क्रम का उद्घाटन लोक सभा  अधक्ष मीरा कुमार ने किया .

Sunday, 28 April 2013


Bihar Government To Constitute Bihar Information Technology Authority (B I T A)

The Bihar government has decided to constitute a Bihar Information Technology Authority (BITA) to develop and expand the IT sector in the state to attract investment. The state government had said last week it would soon announce an Information Communication Technology (ICT) Policy, 2011. An IT department official here said Monday that BITA will be constituted as the apex body to oversee the comprehensive development of the IT sector in the state.
The authority will be headed by Chief Minister Nitish Kumar. A high level committee headed by the chief secretary will be constituted for monitoring the implementation of IT projects. All departments will be required to regularly submit comprehensive reports on the execution of these projects to the committee, the official said. After BITA, district e-governance societies (DeGS) will be constituted in under the chairmanship of the district magistrate with the representation of various departments, including the National Informatics Centre (NIC), to formulate, monitor and implement IT schemes and programmes at the district level.
“In the new IT policy, which is yet to be announced, the plans to constitute BITA has been made categorically clear. The BITA will work to develop the IT sector and e-governance monitoring in the state,” principal secretary of IT Arun Kumar told IANS here.
In a bid to attract investments, the new policy will give industry status to the IT sector. “Nitish Kumar is keen to develop the IT sector in the state,” an official from the chief minister’s office said. “The thrust of the new IT policy would be to attract national and multinational IT companies to invest in the state,” he said.  According to Kumar, the government was committed to providing all possible facilities to IT companies investing in Bihar. He also said the government had decided to introduce IT education in all Plus Two schools in the state. “Students will be given IT education from Class 9 onwards,” he said. Besides, 10 percent of school teachers will be given IT training. Last year, the government had put out its draft IT policy on its official website for suggestions and comments. According to officials in IT partment, suggestions of people associated with different sectors have been incorporated in the new policy. The officials also said that there will be four components of the policy – for citizens, education, governance and for industries. The state government created the department of IT in 2007 to act as the nodal agency for the implementation of the IT policy and computerization within the state.

मुख्यमंत्री गहलोत ने पत्रकार-साहित्य कोष के लिए अतिरिक्त बजट को दी मंजूरी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्रकार-साहित्यकार कोष तथा कलाकार कोष में राज्य सरकार की ओर से 499.99 लाख रूपये का अंशदान देने के संबंध में अतिरिक्त बजट प्रावधान को स्वीकृति दी है। 
मुख्यमंत्री गहलोत ने पत्रकार-साहित्य कोष के लिए अतिरिक्त बजट को दी मंजूरी
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्रकार-साहित्यकार कोष तथा कलाकार कोष में राज्य सरकार की ओर से 499.99 लाख रूपये का अंशदान देने के संबंध में अतिरिक्त बजट प्रावधान को स्वीकृति दी है।
श्री गहलोत ने राज्य बजट 2013-14 में पत्रकार-साहित्यकार कोष तथा कलाकार कोष में राज्य सरकार की ओर से 5-5 करोड़ रूपये का अंशदान देने की घोषणा की थी।


 साभार जनसत्ता एक्सप्रेस 



Sunday, 21 April 2013

बिहार बजट 

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में अधिक व्यय पर ज़ोर दिया है. साथ ही उन्होंने कहा है कि समाज कल्याण के लिए 58 हज़ार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है

उन्होंने उम्मीद जताई है कि अर्थव्यवस्था की विकास दर नौ प्रतिशत रहेगी और महँगाई आने वाले महीनों में घटेगी. हमें उच्च स्तर की विकास दर चाहिए और इस दिशा में नौ प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य है. महँगाई चिंता का विषय है. जहाँ तक काले धन का सवाल है, उसके लिए व्यापक क़दम उठाने की ज़रूरत है. संकेत दिए गए हैं कि ये सरकार सुधार की रह पर चल रही हैबजट 2011-12 की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:कृषि-ग्रामीण क्षेत्र:
  • कृषि क्षेत्र में कर्ज़ के लिए 3.75 लाख करोड़ से बढ़ाकर 4.75 लाख करोड़ रखे गए हैं.
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के बजट को बढ़ाकर 7,860 करोड़ का किया जा रहा है.
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के लिए चरणबद्ध तरीके से 30 अरब रुपए दिए जाएँगे.
  • नई फ़रटीलाइज़र नीति लाई जाएगी.
  • ग्रामीण मूलभूत ढांचे के लिए 180 अरब रुपए का प्रावधान रखा गया है.
  • ग्रामीण इलाकों में घरों के लिए मिलनेवाले कर्ज़ कोष को अब 2000 से 3000 करोड़ रुपए किया गया.
  • देश के पूर्वी हिस्सों में दूसरी हरित क्रांति के लिए 400 करोड़ की वृद्धि.
ग़रीबों के लिए:
  • ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए मिट्टी के तेल, रसोई गैस में मिलनेवाली रियायतें नकद राशि के तौर पर मिलेंगी.
  • भुखमरी और कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय फ़ूड बिल को संसद में पेश किया जाएगा.
  • सामाजिक क्षेत्र के लिए बजट में 17 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी.
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक वेतन 1500 रुपए प्रति माह से 3000 रुपए, सहायकों का वेतन 750 रुपए से बढ़कर 1500 रुपए होगा.
उद्योग जगत और विनिवेश:
  • सार्वजनिक क्षेत्र और अन्य स्रोतों से पूँजी विनिवेश किए जाने से लगभग 400 अरब रुपए जुटाए जाएँगे.
  • एक्साइज़ ड्यूटी को बिना बदलाव के दस प्रतिशत पर ही रखा गया है.
  • सेबी के साथ पंजीकृत म्यूचुयल फंड अब विदेशी निवेश भी ले पाएँगे.
  • बैंकिंग क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 6000 करोड़ रुपए का प्रावधान.
  • केंद्रीय एकसाइज़ करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
  • सर्विस टैक्स रेट को भी बिना किसी बदलाव के 10 प्रतिशत पर रखा गया है.
  • लगभग 130 उपभोक्ता सामग्रियों पर 1 प्रतिशत एकसाइज़ टैक्स लगाया जाएगा.
शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण:
  • शिक्षा क्षेत्र के लिए 24 प्रतिशत की वृद्धि, कुल 52057 करोड़ का प्रावधान.
  • प्रारंभिक शिक्षा के लिए 21 हज़ार करोड़ रुपए रखे गए हैं.
  • इस साल 20 हज़ार लोगों को प्रशिक्षण, 75 प्रतिशत को नौकरी मिलेगी.
  • अनुसूचित जाती व जनजाति के नवीं और दसवीं के 40 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप.
  • स्वास्थ्य क्षेत्र में 20 प्रतिशत वृद्धि और कुल 26760 करोड़ रुपए का प्रावधान.
आयकर:
  • आयकर में छूट की सीमा 1.6 लाख से बढ़ाकर 1.8 लाख की गई.
  • वरिष्ठ नागरिक कहलाने के लिए आयु सीमा को 65 से घटाकर 60 कर दिया गया है.
  • वरिष्ठ नागरिकों को छूट की सीमा को 2.40 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख किया गया.
  • जो वरिष्ठ नागरिक 80 साल के हैं, उनके लिए छूट की सीमा पांच लाख रुपए


महिलाओं की सुरक्षा व  कठोर कार्रवाई हो: यूनिसेफ

unicefदिल्ली में पांच वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार की कड़ी निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने देश में महिलाओं की सुरक्षा में सुधार के लिए ‘कठोर एवं त्वरित कार्रवाई’ का आह्वान किया है.
यूनिसेफ इंडिया ने एक बयान में कहा, ‘दिल्ली में पिछले दिनों बलात्कार की जिस घटना में पांच वर्षीय बच्ची अपनी जिंदगी से जूझ रही है, वह दिखाती है कि भारत में महिलाओं और लड़कियों को गलियों, स्कूलों, कार्यस्थलों और घर में सुरक्षित महसूस कराने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है.’
यूनिसेफ इंडिया ने कहा, ‘बच्ची अपनी जिंदगी से जूझ रही है, ऐसे में यूनिसेफ बच्ची के परिजनों के प्रति सांत्वना व्यक्त करता है और उम्मीद करता है कि वह जल्द ठीक हो जाए.’
हाल में जारी किये गए आंकड़ों का जिक्र करते हुए यूनिसेफ ने कहा, ‘आंकड़ें रूपी उन्हीं सूत्रों से पता चलता है कि तीन बलात्कार पीड़ितों में से एक बच्ची है.’
आंकड़े के अनुसार वर्ष 2011 में भारत में बच्चों के खिलाफ 30 हजार से अधिक अपराध हुए.
इसने कहा, ‘नवजात सहित 7200 से अधिक बच्चों से प्रति वर्ष बलात्कार होते हैं. यूनिसेफ के अनुसार कई मामलों की रिपोर्ट नहीं होती और ऐसे मामलों पर ध्यान नहीं दिया जाता. बिह्र्खोज्खाबर ’

Sunday, 24 March 2013






धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों में पली बढ़ी है नवोदित युवा शयारा अंजलि कौल "अदा", अंजलि छोटे परदे पर अभिनय के लिए भी जानी जाती है इसके अलावा गायकी, बैली डांसिंग, डोकुमेंत्री निर्देशन तथा कश्मीरियत के लिए भी काम करती रही है.अभी हाल ही में दिल्ली में एक मुशयारा में शिरकत करने आई अंजलि "अदा" से बात की हमारे दिल्ली ब्यूरो प्रमुख अमित कुमार ने पेश है प्रमुख अंश :- प्रश्न : अंजलि शायरी में आप संघर्ष कर रहीं है इसके अलावा कुछ और करती है आप ? अंजलि अदा : देखिये शेरों -शायरी के अलावा भी बहुत कुछ है जिसमे मैंने योगदान दिया है मैंने ५० से अधिक टीवी सीरियल में काम किया है इनमे प्रमुख है : सरफ़रोश, जज्बा,पिंजरे के पंछी,उमंग टेली फिल्म अमातव, लौट आओ , हम साया इत्यादि. डांसिंग शो भी देश के साथ साथ विदेशों में भी की है. प्रश्न : आपकी शयारी की कोई संग्रह उपलब्ध है ? अंजलि अदा : जी हाँ, सूफी शयारी की किताब "तेरे इश्क में" जो अभी प्रेस में है कुछ ही दिनों बाद ये मार्केट में उपलब्द होगा. प्रश्न : एक प्रशन जो हमारे पाठक भी आप से जानना चाहते होंगे की कश्मीरी पंडित यूवती कैसे उर्दू शेरो -शयारी की तरफ आकर्षित हुई ? अंजलि अदा : देखिये कश्मीर का एक अपना संस्कृति है, एक सूफी आवोहवा है उस कश्मीरियत माहौल ने मुझे शेरों शायरी की तरफ आकर्षित किया. प्रश्न : अभी आपने मशहूर शायर मंजर भोपाली के साथ स्टेज साझा किया है, कैसा रहा मंजर साहब के साथ का अनुभव ? अंजलि अदा : मंजर भोपाली साहब शेरों शायरी की दुनिया के महान शक्शियत है इनके साथ काम करने का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा. मंजर साहब पिछले चालीस साल से शेरों शयारी से आम लोगों का मनरंजन कर रहें हैं तथा शायरी के माध्यम से गंभीर मुद्दे उठाते रहें है. मंजर साहब बहुत ही खुशमिजाज इंसान है उम्मीद करती हूँ की भविष्य में फिर से मंजर साहब के साथ काम करने का मौका मिलेगा. प्रश्न : कुछ ऐसा जो आपने कश्मीर की वादी की शान्ति और संस्कृति को बचाने के लिए किया हो ? अंजलि अदा : मैं kashmiriyat preservation foundation की महासचिव हूँ. हम कोसिस करते हैं की घाटी में रह रहें तथा विश्व के किसी भी कोने में रह रहे कश्मीरी अपनी सभ्यता और संस्कृति से ना कटें. कश्मीर वादी की जो सभ्यता है वो अपने आप में अनोखी है यंहा की संस्कृति किसी धर्म और जाति से ऊपर है इसको आप गंगा जमुनी संस्कृति का नाम दे सकते है. और इसके अलावा हम आपसी सद्भाव के लिए समय समय पर कार्यकर्म आयोजित करते रहते है. प्रश्न : नब्बे के दशक में जब आतंक कश्मीर वादी में पनप रहा था तब घाटी से कश्मीरी पंडित अपने ही घर से आतंकियों द्वारा खदेड़ दिए गए, वो अपने ही देश में शरणार्थी की स्थिति में हैं. लेकिन आप जैसे कुछ परिवार है जो तमाम परेशानी के वाबजूद घाटी में जमे हुए हैं इसके पीछे क्या कारण है ? अंजलि अदा : मैंने अपनी आँखों से वादी में आतंक को पनपते हुए देखा है उस समय मैं स्कूल की छात्रा थी और जंहा तक मैं मानती हूँ इस तरह के किसी भी घटना में आम कश्मीरी का कोई हाथ नहीं था. कुछ लोग जो घाटी को आशान्त देखना चाहते थे उन्होंने इस तरह की घटना को अंजाम दिया, उन्होंने लोगों को डराया धमकाया घर के बाहर पोस्टर चिपकाये लेकिन इस तरह की घटना को हम सिर्फ आतंकी घटना के तौर पर देखते है इस से आम लोगों का कोई लेना देना नहीं था. घाटी के किसी भी घर में आप जाएँ चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय का घर हो उस घर ने कम से कम अपना एक सदस्य जरूर खोया है. आम कश्मीरी पहले भी भाईचारे के साथ रहते थे अब भी है कश्मीरी अमन पसंद होते हैं. हम कश्मीर में अभी तक इस लिए जमे है की हमारी जड़े कश्मीर की वादियों से गहरी जुड़ी है जिसे कोई नहीं हिला सकता. अगर आप अपने जड़ों से जुड़े है तो कोई भी ताकत आपकों आपकी मिटटी से बेदखल नहीं कर सकता. प्रश्न : कश्मीर में जब आतंकवादी घटना अपने चरम पर थी तब आपने क्या अपने कार्यकर्म को घाटी में बंद कर दिया था ? अंजलि अदा : नहीं बिलकुल नहीं जब वादी में आतंकी घटना बढ़ गई और आपसी सद्भव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाने लगा तब मैं बिना किसी डर और झिझक के घाटी में अपने कार्यकर्म करती रही तथा अपने शो के माध्यम से लोगों में शान्ति और सद्भाव का सन्देश देती रही. प्रश्न : कभी अपने पडोसी मुल्क में भी कोई शो आपने किया है ? अंजलि अदा : हाँ मैंने अपने शो के सिलसिले में पडोसी मुल्क पाकिस्तान की यात्रा की है. और मैं आजादी के बाद की पहली कश्मीरी पंडित महिला हूँ जिसने लाहौर की यात्रा किया है तथा अपना शो सूफी संगीत तथा डांस का परफोर्मेंस दिया है . प्रश्न : कुछ अपने पति धनञ्जय कौल के बारे में बताएं ? अंजलि अदा :मेरे पति धनञ्जय कौल सूफी ग़ज़ल तथा शाश्त्रीय संगीत के गायक है. उन्होंने अपनी संगीत की शिक्षा बनारस की मशहूर ठुमरी गायिका श्रीमती निर्मला अरुण( फिल्म अभिनेता गोविंदा की माँ) से ली है. प्रश्न : आप फुर्सत के क्षणों में क्या करती है ? अंजलि अदा :मुझे फुर्सत के क्षणों में संगीत के आलावा होर्से राइडिंग तथा डांसिंग करना अच्छा लगता है. प्रश्न : आप अपने भाषा ज्ञान के बारे में बातयें, किस किस भाषाओं में आप लिख और बोल सकती हैं ? अंजलि अदा : डोगरी और कश्मीरी मेरी अपनी भाषा है इसके अलावा अंगरेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और बंगाली में अच्छी तरह से बोल और लिख सकती हूँ. प्रश्न : चलते चलते कश्मीर में के बारे में कुछ युवाओं को सन्देश देना चाहेंगी ? अंजलि अदा : कश्मीर में अभी बहुत ही अच्छा माहौल है. सरकार अच्छा काम कर रही है. बहुत सारी योजनायें हैं जो कश्मीरी अल्प्शंख्य्कों को ध्यान में रख कर चलाया जा रहा है. कश्मीर अपने पुराने दिनों में लौट रहा है. पर्यटन के हिसाब से अनुकूल माहौल है. यूवाओं से अपील है की कश्मीर की शान्ति में योगदान दें.
दिल्ली के रामलीला में दिखा नितीश लीला 

 केशव कुमार : बिहार  को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की अपनी मांग को दोहराते हुए बिहार के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में अधिकार रैली को संबोधित करते हुए कहा की इसका लाभ सिर्फ बिहार को नहीं बल्कि बिहार जैसे अन्य पिछड़े राज्यों को भी होगा और सही मायने में देश का समावेशी विकास होगा। नीतीश ने केंद्र पर तंज कसते हुए कहा की बिहार के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता. नीतीश ने केंद्र सरकार को चेताते हुए कहा की दिल्ली में बैठे लोगों को हम बिहारियों की ताकत को पहचानना चाहिए। उन्होंने अपने कार्यकाल में बिहार के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। अगर केंद्र इस समय उसे विशेष दर्जा देता है तो यह विकसित सूबे में शामिल हो सकता है।
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा की पहली बार दिल्ली में इतनी बड़ी तादाद में बिहारियों ने अपने हक को हासिल करने के लिए अपनी ताकत दिखाई है. नीतीश ने बिहार के पिछड़ेपन का खास तौर पर उल्लेख करते हुए कहा की क्या कारन है की कभी विश्व में शिक्षा का केंद्र रहे बिहार के लोग कहीं और जाने पर मजबूर हुए. नीतीश ने कहा कि देश गवाह है बिहार के गौरवशाली इतिहास का. लेकिन आजादी के बाद क्या कारण है कि यह राज्य पिछड़ता गया। लोग शिक्षा और रोजगार के लिए बिहार से बाहर जाने को मजबूर हुए।
नीतीश ने कहा की हम स्वीकार करते हैं की केंद्र सरकार की तरफ से यह सकारात्मक पहल है. यह पूरी तरह हमरे प्रयासों का नतीजा भी है. दरअसल हम यह आवाज लगातार बुलंद करते रहें हैं की विकास में हमारे साथ नाइंसाफी हुई और विशेष राज्य का दर्जा देने के वर्तमान मानक बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को न्याय दिलाने में सक्षम नहीं है. विशेषज्ञों ने भी साफ़ तौर पर माना है की बिहार विकास के तमाम परामीटर पर सबसे निचले पायदान पर है. यह तमाम सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से भी काफी पीछे है. थाल्रुद्ध राज्य और विकास में पिछडापन हमारी मांगों को मजबूती देते हैं. इस अर्थ में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय मानक के तहत भी हमारे साथ विशेष व्यवहार होना चाहिए. नीतीश ने कहा की हम मांग करते हैं की आम बजट में वित्त मंत्री ने जो वादा किया है उसे यथाशीघ्र अमल में लाया जाये.
नीतीश ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा की मुझे मालूम है की दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में भी बिहारी मुश्किलों में रह रहे हैं। लेकिन आप लोग हक के लिए ऐसे ही जुटते रहें। तभी दिल्ली में बैठे लोग इस ताकत को पहचान सकेंगे.
बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) द्वारा आहूत इस रैली में करीब 20-25 हजार लोगों ने शिरकत की. राजनीतिक विश्लेषक इसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहे हैं. लेकिन पार्टी अध्यक्ष शरद यादव इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं. शरद यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा की यह रैली बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करने के लिए बुलाई गई है.
मंच का संचालन वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया. रैली में पार्टी अध्यक्ष शरद यादव, रैली के मुख्या कर्ताधर्ता तथा जद(यू) के बिहार प्रदेशाध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, मंत्री रमई राम, परवीन अमनुलाह, नरेन्द्र सिंह, गौतम सिंह, बिजेंदर कुमार यादव  इत्यादि ने शिरकत की.

Monday, 4 March 2013

कृषि में नई पहल- राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)  के अभियान
कुछ समय पहले मदुरई जिले के पश्चिमी हिस्‍से के गांव में तैनात अधिकारियों ने महिला स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के प्रबंधन की जिम्‍मेदारी पडोस के रज्‍जुकर किसान क्‍लब को सौंपी। मदुरई जिले के मेलूर ब्‍लॉक के लक्ष्‍मीपुरम स्थित यह क्‍लब स्‍थानीय स्‍कूल के गरीब बच्‍चों को हर साल किताबें  बांट रहा है। जिले के वैगई विवासाइगलसंघम के किसान क़ृषि संबंधी कार्यक्रम राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में चला रहे हैं।  यह सब राष्‍ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा देश के गांव में चलाए जा रहे अभियान के तहत हुआ। किसान क्‍लब की अवधारणा नाबार्ड समर्थित है और इसका नारा एक गांव में किसानों का एक क्‍लब है। इसके तहत प्रगतिशील किसान क्‍लब के झंडे तले एकत्रित होते हैं। नाबार्ड तीन वर्षों तक इन क्‍लबों को किसानी के प्रगतिशील तौर-तरीके संबंधी प्रशिक्षण और कृषि संबंधी यात्राओं के लिए राशि उपलब्‍ध कराता ह .मदुरई जिले के विभिन्‍न गावों में अभी 170 किसान क्‍लब काम कर रहे हैं। इन क्‍लबों में सर्वाधिक सफल किसान हैं उत्‍थापनीकनूर के किसान। किसान चमेली उगाते हैं। नाबार्ड ने इस क्‍लब को इंडियन बैंक की साझेदारी में 30 क्‍लबों में शुमार किया है। एक कदम बढकर इन क्‍लबों ने एक फेडरेशन बनाया है जिसका नाम है उत्‍थापनीकनूर फलावर ग्रोअर फेडरेशन। जास्‍मीन उगाने वाले किसान चाहते हैं कि वे स्‍वयं अपना बाजार चलाएं। किसान इसके लिए जिला प्रशासन से समर्थन चाहते हैं और सिद्धांत रूप में उन्‍हें जमीन देने की मंजूरी भी दी गई है नाबार्ड ने मदुरई जिले के अलंगनाल्‍लानूर के सहकारिता क्षेत्र की प्राथमिक कृषि सहयोग समितियां को इस तरह के क्‍लब बनाने की मंजूरी दी है। हाल में अलंगनाल्‍लानूर ब्‍लॉक में परीपेट्टी किसान क्‍लब और देवासेरी किसान क्‍लब के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलाया गया।नाबार्ड के एजीएम श्री शंकर नारायण की राय है कि किसान वैल्‍यू चैन की बारीकियों को पूरी तरह समझें। इससे उन्‍हें लाभ होगा और वे किसान क्‍लब को परिवर्तन एजेंट समझ लाभ की ओर बढ सकते हैं। उन्‍हें नवीनतम टेक्‍नॉलोजी के बारे में जानकारी मिल सकेगी, विशेषज्ञों की मदद ले सकेंगे और अतंत: अपने पेशे में निपुण हो जाएंगे।
     उन्‍होंने बताया कि नाबार्ड अपने किसान टेक्‍नॉलोजी ट्रांसफर फंड के जरिए किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, डेमोप्‍लॉट का विकास और कृषि ज्ञान के लिए किसानों की यात्राओं जैसे प्रयासों का पूरा खर्च वहन करेगा। उन्‍होंने कहा कि आने वाले दिनों में आम और अमरूद के पौधे लगाने के लिए गम्‍भीर प्रयास किए जाएंगे।           नाबार्ड किसान क्‍लब के लिए हर तीन साल पर दस हजार रूपये की राशि आबंटित करता है। तीन साल बाद किसान क्‍लब से जुडे लोगों को प्रोत्‍साहित किया जाता है कि वे वैसी छोटी-छोटी बचत करें जिनसे रोजाना के खर्च पूरा हो सकें और जरूरत पडने पर एक-दूसरे को ऋण भी दे सके. किसान क्‍लब कार्यक्रम के तहत किसानों को तीन सालों के लिए वार्षिक रख-रखाव ग्रांट भी मिलता है। किसान तमिलनाडु में प्रशिक्षण के लिए कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं (पुड्डुकोटई, कोयम्‍बटूर, त्रिची और कांचीपूरम किसान ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए चुने गए हैं।  किसानों को इस कार्यक्रम के तहत रायटर मार्केट लाइट लिमिटेड के जरिए स्‍थानीय भाषा में एसएमएस एलर्ट भी हा‍सिल होते हैं। जल प्रबंधन, डेयरी, ओर्गेनिक किसानी तथा सब्‍जी उगाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों की राय भी मिलती है।       क्‍लब की अवधारणा का लाभ उठाते हुए किसानों तथा क्‍लबों को नियमित बैठकें करनी चाहिए। प्रत्‍येक महीने बचत करनी चाहिए ताकि जरूरत पडने पर एक दूसरे की मदद हो सके। इसके अलावा उन्‍हें ऋण अदायगी के उचित व्‍यवहारों का भी प्रचार करना चाहिए तथा अपने उत्‍पादों के मूल्‍यवर्धन पर ध्‍यान देना चाहिए ताकि वे स्‍वयं अपनी उत्‍पादक कंपनी खडी कर सकें।

ग्रामीण विकास मंत्रालय को अगले वित्त वर्ष में 80,194 करोड़ रूपए की राशि

 ग्रामीण विकास मंत्रालय को अगले वित्त वर्ष में 80,194 करोड़ रूपए की राशि 
 ग्रामीण विकास मंत्रालय को अगले वित्त वर्ष में 80,194 करोड़ रूपए की राशि दी जाएगी। आज लोकसभा में अगले वित्त वर्ष 2013-14 के लिए आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा कि फ्लैगशिप कार्यक्रमों पर मंत्रालय द्वारा चालू वर्ष में 55,000 करोड़ रूपए की राशि खर्च करने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष के लिए मंत्रालय को मेरा 80,194 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव है, जो पिछले वर्ष से 46 प्रतिशत अधिक है। मनरेगा के लिए 33,000 करोड़ रूपए, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 21,700 करोड़ रूपए और इंदिरा आवास कार्यक्रम के लिए 15,184 करोड़ रूपए होंगे। श्री चिदम्बरम ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को कई राज्यों में काफी हद तक पूरा कर लिया गया है। इसलिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 शुरू की जाएगी, जिसके लिए कुछ राशि रखी जा रही है। इस नए कार्यक्रम से आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों को लाभ होगा। इस कार्यक्रम का विस्तृत ब्यौरा ग्रामीण विकास मंत्री उचित समय पर देंगे। वित्त मंत्री ने पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के लिए 15,260 करोड़ रूपए आबंटित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि देश में आर्सेनिक के जल-प्रदूषण वाली 2000 और फ्लोराइड के जल-प्रदूषण वाली 12000 ग्रामीण बस्तियां हैं। इनके पानी की सफाई के संयंत्र लगाने के लिए उन्होंने 1400 करोड़ रूपए के आबंटन का प्रस्ताव रखा। वित्त मंत्री ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन 12वीं योजना में भी जारी रहेगा। वर्ष 2009 से 2012 तक शहरी परिवहन में योगदान के लिए 14,000 बसें दी गई थी। उन्होंने इस मिशन के वास्ते अगले वित्त वर्षमें 14,873 करोड़ रूपए देने का प्रस्ताव रखा। चालू वर्ष के संशोधित अनुमान में यह राशि 7,383 करोड़ रूपए थी। इस राशि का अधिकतर हिस्सा 10,000 बसों की खरीद के लिए, विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों द्वारा खर्च किया जाएगावित्‍त मंत्री पी. चिदबंरम ने आज संसद में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए बताया कि अनेक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम लागू करने वाले ग्रामीण विकास मंत्रालय के बजटीय आवंटन में भारी बढ़ोतरी की गई है। अपने बजट भाषण में वित्‍त मंत्री ने यह घोषणा की कि मंत्रालय को 2013-14 में 80,194 करोड़ रुपये दिये जाएंगे जबकि 2012-13 में 55 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे। इस प्रकार आवंटन में 46 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ को 33 हजार करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 21,700 करोड़ रुपये तथा इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) को 15,184 करोड़ रुपये प्रदान किये जाएंगे। 
वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उद्देश्‍य अनेक राज्‍यों में व्‍यापक रूप से पूरे कर लिए गये हैं और ये राज्‍य इस बारे में और कार्य करने के इच्‍छुक हैं, इसलिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 शुरू करने और नये कार्यक्रम को धन का एक हिस्‍सा आवंटित करने का प्रस्‍ताव है। इससे आंध्र प्रदेश, हरियाण, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, पंजाब और राजस्‍थान जैसे राज्‍यों को फायदा होगा। 
इसी प्रकार पेय जल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय को चालू वर्ष के दौरान 15,260 करोड़ रुपये दिये जाएंगे जबकि संशोधित अनुमान 13 हजार करोड़ रुपये का था। उन्‍होंने जल शुद्ध करने के सयंत्रों की स्‍थापन करने के‍लिए 1400 करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराने का भी प्रस्‍ताव किया है क्योंकि देश में अभी भी 2000 आर्सिनिक और 12 हजार फ्लोराइड से प्रभावित ग्रामीण बस्तियां मौजूद हैं।

Sunday, 3 March 2013

किलकारी भवन में स्कूली बच्चे परियोगिता में भाग लेते

Saturday, 16 February 2013


विदेशी बालाओं संग 'गोल्डन बाबा' ने किया शाही स्नान, देखिए दिलचस्प तस्वीरें
प्रयाग के  महाकुंभ के बसंत पंचमी शाही स्नान पर सबसे बड़े संन्यासी अखाड़े जूना अखाड़े के स्नान के दौरान दिल्ली के सोने वाले बाबा बिट्टू भगत का जादू चला। ग्लैमरस इतालवी मॉडलों से घिरे और सोने के आभूषणों से लदे गोल्डन बाबा के जुलूस में या तो सोने का आकर्षण था और या फिर खूबसूरत विदेशी बालाओं का जादू। हर-हर महादेव के उद्घोष के बीच दिल्ली के अशोक गली (गांधी नगर) वाले गोल्डन बाबा और उनके भगवा वस्त्र धारी विदेशी भक्तो ने सबसे ज्यादा धूम मचाई।

Friday, 15 February 2013


कार्तिक  कृष्णअष्टमी को महिलायें अपनी सन्तान की रक्षा और दीर्घ आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन धोबी मारन लीला का भी मंचन होता है, जिसमें श्री कृषण  द्वारा कंस के भेजे धोबी का वध करते प्रदर्शन किया जाता है।

Thursday, 14 February 2013


उसने 'सत्‍यमेव जयते' कहा, और उसका परिवार बच गया!


अफज़ल गुरु को हुई फांसी के बाद अब तक उठी तमाम बहसों में  उसके द्वारा अपने वकील सुशील कुमार को लिखी गई चिट्ठी का जि़क्र बार-बार आया है। यह चिट्ठी अब एक ऐतिहासिक दस्‍तावेज है, क्‍योंकि इसमें एक आत्‍मसमर्पित आतंकवादी समूची राज्‍य व्‍यवस्‍था पर कुछ सवाल खड़े करता है, उसके काम करने के तरीकों को उजागर करता है और आखिरकार यह स्‍वीकार करता है कि उसकी नियति दरअसल अपने परिवार को बचाने की उसकी सदिच्‍छा का परिणाम थी। यह चिट्ठी अक्‍टूबर 2006 में दिल्‍ली के प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा रखी गई एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में सार्वजनिक की गई थी जिसके आधार पर मैंने साप्‍ताहिक पत्रिका 'सहारा समय' के आखिरी अंक (8 अक्‍टूबर 2006) में एक स्‍टोरी भी की थी। अफज़ल के मामले पर खर्च किए गए लाखों शब्‍दों पर यह इकलौती चिट्ठी भारी पड़ती है। विडंबना यह है कि अक्‍टूबर 2006 से लेकर अब फांसी दिए जाने के बीच सात साल के दौरान हालांकि यह चिट्ठी मीडिया में तकरीबन दबी ही रही, आज भले इसकी चर्चा हो रही हो लेकिन उसका शायद कोई मोल नहीं है। साथ में उस वक्‍त की कुछ तस्‍वीरें भी हैं। (अभिषेक श्रीवास्‍तव) 


माननीय श्री सुशील कुमार,
नमस्कार

मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूं और अहसानमंद महसूस करता हूं कि आपने मेरे मुकदमे को अपने हाथ में लेकर मेरा बचाव करने का फैसला लिया। इस मुकदमे की शुरुआत से ही मेरी उपेक्षा की गई है और कभी भी मुझे मीडिया या न्यायालय के समक्ष सचाई उजागर करने का मौका नहीं दिया गया। तीन अर्जियों के बावजूद अदालत ने मुझे वकील मुहैया नहीं करवाया। उच्च न्यायालय में एक मानवाधिकार अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अफज़ल की इच्छा फांसी से लटकने की बजाय नशीला इंजेक्शन लेने की है। यह बात सरासर गलत है। मैंने अपने वकील को कभी ऐसा कुछ नहीं बताया था। चूंकि वह वकील मेरे या मेरे परिवार का चुनाव नहीं था, बल्कि मेरी असहायता और एक उपयुक्त वकील तक पहुंच न हो पाने का नतीजा था। उच्च सुरक्षा वाली जेल में कैद किए जाने और उस मानवाधिकार अधिवक्ता से कोई संवाद न होने की स्थिति में मैं उसे बदल नहीं सका या उच्च न्यायालय के सामने अपनी मृत्यु इच्छा संबंधी आपत्तियों को दर्ज नहीं करा सका चूंकि उच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही यह बात मुझे पता चली। 

संसद पर हमले वाले मामले में मुझे कश्मीर की स्पेशल टास्क फोर्स ने गिरफ्तार किया था। यहां दिल्ली में निर्धारित न्यायालय ने विशेष पुलिस के उस बयान के आधार पर मुझे फांसी की सजा सुनाई जो एसटीएफ के साथ मिलकर काम करती है और जिस पर मीडिया का खासा प्रभाव था जिसके समक्ष मुझे विशेष पुलिस एसीपी राजबीर सिंह के दबाव और खौफ के चलते अपराध कबूल करवाया गया। इस खौफ और दबाव की पुष्टि न्यायालय के समक्ष 'आज तक' के साक्षात्कर्ता शम्स ताहिर ने भी की। 

जब मुझे श्रीनगर बस स्टैंड से गिरफ्तार किया गया तो मुझे एसटीएफ के मुख्यालय ले जाया गया। यहां से एसटीएफ और विशेष पुलिस मुझे दिल्ली ले आई। श्रीनगर के पारमपोरा पुलिस स्टेशन पर मुझसे मेरी सभी चीजें छीन ली गईं, मेरी पिटाई की गई और मुझे धमकी दी गई कि यदि मैंने किसी के भी सामने सचाई बयान की तो मेरी पत्नी और परिवार के लिए नतीजे बुरे होंगे। यहां तक कि मेरे छोटे भाई हिलाल अहमद गुरु को भी बगैर किसी वारंट इत्यादि के गिरफ्तार कर लिया गया और 2-3 महीनों तक पुलिस हिरासत में रखा गया। यह बात सबसे पहले मुझे राजबीर सिंह ने बताई थी। विशेष पुलिस ने मुझसे कहा कि यदि मैं उनके मुताबिक बयान देता हूं तो मेरे परिवार को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा और यह झूठा आश्वासन भी दिया कि वे मेरे मुकदमे को कमजोर कर देंगे जिससे कुछ दिनों बाद मैं रिहा हो जाऊंगा। 

अफज़ल का बेटा 
मेरी प्राथमिकता मेरे परिवार को सुरक्षित रखने की थी क्योंकि पिछले सात साल से मैं देख रहा हूं कि किस तरह एसटीएफ के लोग कश्मीरियों की हत्या कर रहे हैं, उन्होंने युवाओं को गायब किया है और उसके बाद पुलिस हिरासत में उन्हें मार डाला है। इन तमाम प्रताड़नाओं और हिरासत में मौतों का मैं एक जीता-जागता प्रत्यक्षदर्शी हूं और खुद एसटीएफ के खौफ और प्रताड़ना का शिकार हूं। चूंकि, मैं पहले जेकेएलएफ का आतंकवादी था और मैंने आत्मसमर्पण कर दिया था, मुझे विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों जैसे सेना, बीएसएफ और एसटीएफ ने मिलकर उत्पीड़ित, प्रताड़ित और खौफज़दा किया है। लेकिन, चूंकि एसटीएफ असंगठित बल है और राज्य सरकार द्वारा संरक्षित लुटेरों का एक गुट है, वे कश्मीर के किसी भी घर और किसी भी परिवार में किसी भी वक्त घुस जाते हैं। अगर एसटीएफ ने किसी को भी उठा लिया और उसके परिवार को इसकी जानकारी मिल जाती है, तो फिर परिजन सिर्फ लाश की ही उम्मीद रखते हैं और उसका इंतजार करते हैं। लेकिन अमूमन वे यह कभी नहीं जान पाते कि अपहृत व्यक्ति का ठिकाना क्या है। छह हजार जवान लड़के इस तरीके से गायब हो चुके हैं। 

इन्हीं परिस्थितियों और भयपूर्ण वातावरण में मेरे जैसे लोग एसटीएफ के हाथों कोई भी गंदा खेल खेलने को तैयार हो जाते हैं जिससे कम से कम जान बची रहे। जो लोग पैसे खिलाने की क्षमता रखते हैं, उन्हें मेरी तरह बुरे काम करने को मजबूर नहीं किया जाता चूंकि मैं पैसे देने में अक्षम रहा था। यहां तक कि पारमपोरा पुलिस स्टेशन के एक पुलिसकर्मी अकबर ने तो मुझसे 5 हजार रुपए फिरौती की मांग की थी। यह बात संसद पर हमले से बहुत पहले की है। उसने मुझे धमकी दी थी कि फिरौती की रकम न मिलने पर वह मुझे नकली दवाएं और चिकित्सीय उपकरण बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर लेगा। मैं 2000 में सोपोर में इनका व्यापार करता था। वह भी यहां निर्धारित न्यायालय के समक्ष पेश हुआ था और उसने मेरे खिलाफ बयान दिया था। संसद पर हमले से बहुत पहले से वह मुझे जानता था। अदालत के कक्ष में उसने मुझे कश्मीरी में बताया कि मेरा परिवार सही सलामत है। दरअसल, यह एक छुपी हुई धमकी थी जिसे अदालत समझ नहीं पाई थी, नहीं तो मैंने जरूर अदालत के समक्ष उससे सवाल पूछा होता जब उसने अपना बयान दर्ज कराते वक्त यह बात मुझे बताई थी। पूरे मुकदमे के दौरान मैं मूक और असहाय दर्शक बना रहा जबकि सभी गवाह, पुलिस और यहां तक कि जज भी मिलकर मेरे खिलाफ एक हो गए थे। मैं अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित और असमंजस में रहा। अब मैंने अपने परिवार को बचा लिया है, भले ही यह झूठ बोलने के लिए मुझे मौत दी जा रही है तो क्या!

1997-98 में मैंने दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों का एक व्यापार कमीशन के आधार पर चालू किया, चूंकि एक आत्मसमर्पित आतंकवादी होने के नाते मुझे सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती थी। आत्मसमर्पित आतंकवादियों को नौकरियां नहीं मिलतीं। उन्हें या तो एसटीएफ के साथ विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के तौर पर काम करना होता है या सुरक्षा बलों और पुलिस के संरक्षण में लुटेरों की मंडली में शामिल होना होता है। रोज ही ये विशेष पुलिस अधिकारी आतंकवादियों के हाथों मारे जाते थे। ऐसी स्थिति में मैंने अपना कमीशन आधारित व्यापार शुरू किया जिससे महीने में 4-5 हजार की कमाई हो जाती थी। चूंकि, एसपीओ अक्सर उन आत्मसमर्पित आतंकवादियों को प्रताड़ित करते हैं जो एसटीएफ के साथ काम नहीं करते, लिहाजा 1998 से 2000 के बीच मुझे अमूमन 300 से 500 रुपए स्थानीय एसपीओ को देने पड़ते जिससे मैं अपना काम-धंधा जारी रख सकता था। नहीं तो ये एसपीओ मुझे सुरक्षा एजेंसियों के सामने ले जाते। एक एसपीओ ने तो मुझे एक दिन बताया भी था कि उसे अपने अधिकारियों को पैसे देने पड़ते हैं। मैंने मेहनत से काम किया और मेरा व्यापार चमक गया। एक दिन सुबह 10 बजे मैं दो महीने पहले ही अपने नए खरीदे स्कूटर से जा रहा था। मुझे एसटीएफ के लोगों ने घेर लिया और एक बुलेटप्रूफ जिप्सी में पलहल्लन शिविर ले गए। वहां डीएसपी विनय गुप्ता ने मुझे प्रताड़ित किया, बिजली के झटके दिए, ठंडे पानी में डाला, पेट्रोल और मिर्च का इस्तेमाल भी किया। उन्होंने मुझे बताया कि मेरे पास हथियार हैं। शाम को उनके एक इंस्पेक्टर फारुक ने मुझे कहा कि यदि मैं उन्हें 10 लाख रुपए दे देता हूं तो मुझे छोड़ दिया जाएगा अन्यथा वे मुझे जान से मार देंगे। इसके बाद वे मुझे हमहामा एसटीएफ शिविर में ले गए जहां डीएसपी दरविंदर सिंह ने भी मुझे प्रताड़ित किया। उन्हीं के एक इंस्पेक्टर शैंटी सिंह ने नंगा करके मुझे तीन घंटों तक मुझे बिजली के झटके दिए और उसी दौरान जबर्दस्ती पानी भी पिलाया। 

आखिरकार मैं उन्हें दस लाख रुपए देने को तैयार हो गया जिसके लिए मुझे अपनी पत्नी के सोने के गहने बेचने पड़े। इसके बावजूद केवल 80 हजार का ही इंतजाम हो पाया। इसके बाद वे मेरा स्कूटर ले गए जो मैंने 2-3 महीने पहले ही 24 हजार रुपए में खरीदा था। एक लाख रुपए पाने के बाद उन्होंने मुझे छोड़ा लेकिन अब मैं पूरी तरह टूट चुका था। उसी हमहामा एसटीएफ शिविर में तारिक नाम का एक और शिकार था उसने मुझे सलाह दी थी कि मैं हमेशा एसटीएफ का सहयोग करूं, नहीं तो वे मुझे प्रताड़ित करेंगे और सामान्य जिंदगी नहीं जीने देंगे। यह मेरे जीवन का एक निर्णायक मोड़ था। मैंने वैसे ही जीने का फैसला कर लिया जैसे मुझे तारिक ने बताया था। 1990 से 1996 तक मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई की थी और विभिन्न कोचिंग सेन्टरों और घरों पर जाकर ट्यूशन पढ़ाता था। यह जानकारी बड़गाम के एसएसपी अशफ़ाक हुसैन के साले अल्ताफ़ हुसैन को थी, चूंकि इसी ने मेरे परिवार और हमहामा के डीएसपी दरविंदर सिंह के बीच दलाल की भूमिका निभाई थी। अल्ताफ़ ने मुझे कहा कि मैं उसके दो बच्चों को पढ़ाऊं चूंकि आतंकवादियों के खौफ़ की वजह से वे ट्यूशन पढ़ने नहीं जा पाते। इनमें एक दसवीं में था, दूसरा बारहवीं में। इस तरह अल्ताफ से मेरी नजदीकियां बढ़ीं। एक दिन अल्ताफ मुझे डीएसपी दरविंदर सिंह के पास ले गया और बताया कि मुझे उनके लिए एक छोटा सा काम करना पड़ेगा। 

काम यह था कि एक आदमी को दिल्ली ले जाना था और उसे वहां एक किराए का घर दिलवाना था, चूंकि मैं दिल्ली को बेहतर तरीके से जानता था। मैं उस व्यक्ति को नहीं जानता था, लेकिन मुझे संदेह था कि वह कश्मीरी नहीं है क्योंकि वह कश्मीरी नहीं बोलता था। लेकिन मैं असहाय था और मुझे दरविंदर का काम करना ही था। मैं उसे दिल्ली ले गया। एक दिन उसने मुझसे कहा कि वह एक कार खरीदना चाहता है। मैं उसे करोलबाग लेकर गया। उसने कार खरीदी। दिल्ली में वह तमाम लोगों से मिलता था और हम दोनों को दरविंदर सिंह के फोन कॉल आते रहते थे। एक दिन मोहम्मद ने मुझे बताया कि अगर मैं कश्मीर जाना चाहूं तो जा सकता हूं। उसने मुझे पैंतीस हजार रुपए भी दिए और कहा कि यह मेरे लिए एक उपहार है। 

अफज़ल गुरु की पत्‍नी
छह या आठ दिन पहले मैंने इंदिरा विहार में अपने परिवार के लिए एक किराए का कमरा ले लिया था। चूंकि मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अब दिल्ली में ही रहूंगा क्योंकि मैं अपने इस जीवन से संतुष्ट नहीं था। मैंने किराए के मकान की चाबियां अपनी मकान मालकिन को थमा दीं और उसे बताया कि मैं ईद के बाद 14 दिसंबर को लौटूंगा क्योंकि संसद पर हमले के बाद वहां काफी तनाव था। मैंने श्रीनगर में तारिक से संपर्क किया। शाम को उसने मुझसे पूछा कि मैं कब वापस आया। मैंने बताया कि मुझे आए हुए सिर्फ एक घंटा हुआ है। अगली सुबह जब मैं सोपोर जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़ा था, श्रीनगर पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर लिया और पारमपोरा पुलिस थाने ले गई। तारिक वहां एसटीएफ के साथ मौजूद था। उन्होंने मेरी जेब से 35000 रुपए निकाल लिए, मेरी पिटाई की और सीधे मुझे एसटीएफ मुख्यालय ले गए। वहां से मुझे दिल्ली लाया गया। मेरी आंखों को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। यहां मैंने खुद को विशेष पुलिस के उत्पीड़न कक्ष में पाया। 

विशेष सेल की हिरासत में मैंने उन्हें मोहम्मद इत्यादि के बारे में सब कुछ बताया लेकिन उन्होंने मुझे बताया कि मैं, शौकत, उसकी पत्नी नवजोत (अफशां) और गिलानी ही संसद पर हमले के पीछे हैं। उन्होंने मेरे परिवार को लेकर मुझे धमकाया और उनमें से एक इंस्पेक्टर ने बताया कि मेरा छोटा भाई हिलाल अहमद गुरु भी एसटीएफ की हिरासत में हैं और यदि मैंने उनका सहयोग नहीं किया तो वे मेरे दूसरे परिजनों को भी उठवा लेंगे। इसके बाद उन्होंने मेरे ऊपर दबाव डाला कि मैं शौकत, उसकी पत्नी और गिलानी को दोषी ठहराऊं लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने उन्हें बताया कि यह असंभव है। फिर उन्होंने मुझे कहा कि मुझे गिलानी के निर्दोष होने के बारे में चुप रहना है। कुछ दिनों बाद मुझे मीडिया के सामने पेश किया गया। वहां एनडीटीवी, आज तक, जी न्यूज, सहारा टीवी आदि थे। एसीपी राजबीर सिंह भी वहां थे। जब एक साक्षात्कर्ता ने मुझे बताया कि संसद पर हमले में गिलानी की क्या भूमिका है, तो मैंने भी ऐसे ही कह दिया कि गिलानी निर्दोष हैं, ठीक इसी वक्त एसीपी राजबीर सिंह अपनी घूमती हुई कुर्सी से उठे, मेरे ऊपर चिल्लाते हुए उन्होंने कहा कि मुझे पहले ही हिदायत दी गई थी कि मीडिया के सामने गिलानी के बारे में कुछ नहीं बोलना है। राजबीर के व्यवहार ने मेरी असहायता को प्रदर्शित कर दिया और कम से कम मीडिया के लोग यह जान गए कि अफजल जो भी बयान दे रहा है वह दबाव और खौफ में दे रहा है। इसके बाद राजबीर सिंह ने टीवी के लोगों से अनुरोध किया कि गिलानी वाला सवाल दिखाया न जाए। 

शाम के वक्त राजबीर सिंह ने मुझसे पूछा कि क्या मैं परिवार से बात करना चाहता हूं। मैंने हां में जवाब दिया। फिर मैंने अपनी पत्नी से बात की। फोन करने के बाद उन्होंने मुझे बताया कि यदि मैं अपनी पत्नी और परिवार को जिंदा देखना चाहता हूं तो हर कदम पर उनका सहयोग करूं। वे मुझे दिल्ली में तमाम जगहों पर ले गए। वहां उन्होंने मुझे वे जगह दिखाईं जहां से मोहम्मद ने तमाम चीजें खरीदी थीं। वे मुझे कश्मीर ले गए और हम वहां से बगैर कुछ किए वापस आ गए। उन्होंने मुझसे कम से कम 200-300 कोरे कागजों पर दस्तखत करवाए। 

मुझे निर्धारित कोर्ट में अपनी कहानी सुनाने का मौका ही नहीं दिया गया। जज ने मुझे बताया कि मुकदमे के अंत में मुझे बोलने का पूरा मौका दिया जाएगा, लेकिन आखिरकार न तो उन्होंने मेरे बयानों को दर्ज किया और न ही अदालत ने दर्ज किए गए बयान मुझे मुहैया कराए। यदि ध्यान से रिकॉर्ड किए गए फोन नंबरों को देखा जाता तो अदालत यह जान जाती कि वे एसटीएफ के फोन नंबर थे। 

अब मुझे उम्मीद है कि उच्चतम न्यायालय मेरी असहाय स्थिति और उस सचाई को समझ सकेगा जिससे मैं गुजरा हूं। एसटीएफ ने अपने और कुछ अन्य अज्ञात लोगों द्वारा निर्मित और निर्देशित इस आपराधिक गतिविधि में मुझे बलि का बकरा बना दिया। इस पूरे खेल में विशेष पुलिस निश्चित तौर पर एक हिस्सा है चूंकि हर वक्त उन्होंने मेरे ऊपर चुप रहने का दबाव डाला। मुझे भरोसा है कि मेरी इस चुप्पी को सुना जाएगा और मुझे न्याय मिलेगा। 

मैं एक बार फिर आपको दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि आपने मेरा बचाव किया। 

सत्यमेव जयते। 


मोहम्मद अफज़ल 
पुत्र हबीबुल्ला गुरु
वार्ड न. 6 (उच्च सुरक्षा वार्ड)
जेल न. 1, तिहाड़
नई दिल्ली-110064 

    jan e portal se sabhar

Tuesday, 29 January 2013


धरती पर ढ़ेरो आते है यायावर ,पर कुछ ही होते है कर्पूरी जैसे कद्दावर 
कल्पना कीजिए कि किसी विधायक के पिता को कोई सामंती डंडे से इतना पीटे कि वह जमीन पर गिर पड़ें और उसके पैरों को पकड़ कर दया की भीख मांगे. लेकिन जब इस घटना की भनक विधायक पुत्र और प्रशासन को लगी होगी तो अंजाम क्या हुआ होगा ? कुछ नहीं ! इतना ही नहीं उस सामंती को सजा दिलाने के बदले खुद वह विधायक असाधारण महानता दिखाते हुए अपने पिता की ओर से सामनती से माफी मांगे.


यह घटना जुड़ी है बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर से. बड़े भावुक अंदाज में इस घटना का जिक्र कर्पूरी ठाकुर के बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री रामनाथ ठाकुर सुनाते हुए कहते हैं “बाबू जी ने जिस दिन 1952 में विधानसभा की सीट जीती उस दिन उनके पिता गोकुल ठाकुर जश्न मनाने लगे और देर हो गई. इस कारण वह अपने महाजन (रामनाथ को उस आदमी का नाम याद नहीं) की दाढ़ी बनाने देर से पहुंचे. बस क्या था उस सामंती का क्रोध जाग उठा और उसने मेरे दादा को बेरहमी से पीटा. जब इसकी खबर कर्पूरी बाबू को मिली तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों को आगाह किया कि वे उनके निजी मामले में न पड़ें, फिर वे दादा जी के साथ महाजन के दरबार में पहुंचे और उनकी ओर से माफी मांगी.”
बताया जाता है कि इस घटना का इतना व्यापक असर पड़ा कि पिछड़ों और दलितों में जननायक से विख्यात कर्पूरी बाबू को उच्च वर्गों का भी भारी जनसमर्थन मिलता रहा और वे 1952 से अपनी मृत्यु 18 फरवरी 1988 तक विधानसभा के किसी भी चुनाव में कभी परास्त नहीं हुए.
यह घटना जननायक के नाम से मशहूर कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व का वह आईना है जिन्होंने वर्णवादी व्यवस्था के मजबूत किले को दरका कर सामाजिक न्याय की धारा को नई दिशा दी. और जिनके बनाये रास्ते पर रामविलास पासवान, लालू प्रसाद व नीतीश कुमार चल कर आगे बढ़े.
एक गरीब नाई परिवार के यहाँ समस्तीपुर के पितौझिया गांव में 24 जनवरी 1924 को जन्मे कर्पूरी पेट भरने के लिए खुद भी अपने पिता के साथ महाजनों की हजामत बनाते थे. लेकिन समाज बदलने की उनकी विशाल आकांक्षा ने उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा दिया. 1970 में मुख्यमंत्री के पद पर वह तब आसीन हुए जब सामंतवाद की जकड़न समाज से ढ़ीली भी नहीं हुई थी. वह बिहार के पहले गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री बने.दलितों और पिछड़ों में सामाजिक चेतना जागृत कर शोषण से मुक्ति दिलाने के नारे के साथ उन्होंने दूसरी बार 1977 में भी मुख्यमंत्री का पद संभाला.
इससे पहले वह शिक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवायें दे चुके थे. राम मनोहर लोहिया से समाजवाद की शिक्षा लेने वाले कर्पूरी यह मानते थे कि शिक्षा और रोजगार के अवसर के बिना पिछड़ों को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता. जेपी आनदेलन में कर्पूरी के साथ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कारू बताते हैं “बतौर शिक्षामत्री कर्पूरी बाबू यह अच्छी तरह जानते थे कि पिछड़ों और दलितों के लिए पढ़ाई में असफल होने की वजह अंग्रेजी विषय में फेल होना थी, क्योंकि उस दौर में अंग्रेजी आम लोगों की पहुंच से दूर थी. उन्होंने मैट्रिक तक अंग्रेजी को वैकल्पिक भाषा बना दिया जिससे इसमें फेल होने के बावजूद हजारों छात्र मैट्रिक पास करने लगे. कर्पूरी के इस फार्मूले ‘पास विदाउट इंग्लिश’ (पीडब्ल्यूई) की काफी आलोचना भी हुई. लोग ऐसे छात्रों को पीड्ब्ल्यूडी कह कर चिढ़ाया करते थे.”
सामाजिक न्याय के पथप्रदर्शक
लेकिन इसके व्यापक प्रभाव का लोगों को तब अंदाजा हुआ जब 1978 में उन्होंने पिछड़ी जातियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दे दिया. कर्पूरी के इस फैसले के पहले समाज की पिछड़ी जातियों का एक बड़ा तबका सरकारी सेवाओं में जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता था. बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य निहोरा प्रसाद यादव कर्पूरी के करीब रहे हैं. वह कहते हैं, “आजादी के बाद की राजनीति में पिछड़ा उभार की धारा के सृजनकर्ता कर्पूरी बाबू ही थे जिन्होंने ने सामाजिक और राजनीतिक आनदोलनों के बूते संसदीय राजनीति में पिछड़ों और शोषितों का लोहा मनवाया था. और बाद में इस धारे की अगुवाई लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने की. कर्पूरी बाबू अपनी मौत के पहले विधानसभा में विरोधी दल के नेता थे और उनके बाद यह पद लालू प्रसाद को ही मिला.”
लालू और नीतीश पर कर्पूरी बाबू के व्यापक प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये दोनों इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं कि जननायक ही उनके राजनीतिक संरक्षक रहे हैं. पिछले दिनों एक समारोह में नीतीश ने कहा भी था, “कर्पूरी बाबू गरीबों के वास्तविक रूप में मसीहा थे और बिहार का विकास जननायक के सामाजिक न्याय के रास्ते का अनुसरण करके ही संभव है.” नीतीश ने जब अतिपिछड़ों और महिलाओं को पंचायतों में आरक्षण देने की घोषणा की तब भी उन्होंने कर्पूरी को याद करते हुए कहा था कि यह कर्पूरी के अधूरे कामों को बढ़ाने का प्रयास है.
कर्पूरी ठाकुर जहाँ पिछड़ों को आरक्षण देने जैसे मुश्कलि फैसले लेने में पीछे नहीं हटे वहीं उन्होंने अपने कार्यकाल में बेरोजगारी कम करने के लिए अनेक लोकलुभावन फैसले भी लिए. इनमें से एक यह भी था कि उन्होंने बिहार के छह हजार इंजिनियरों को पटना के गांधी मैदान में बुलाकर नियुक्तिपत्र सौंपा था. उस अभियान में शायद ही कोई इंजिनियर ऐसा बचा जो बेरोजगार रह गया हो. कर्पूरी के ऐसे कदम से उन्हें जननायक तक कहा जाने लगा. वहीं दूसरी ओर कर्पूरी में आम आदमी के साथ जुड़े रहने की अद्भुत कला भी थी. बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.पी ओझा, जो कर्पूरी के मुख्यमंत्रित्व काल में उनके गृह जिला के एसपी थे, उन दिनों को याद करते हैं, “कर्पूरी बाबू जब भी समस्तीपुर आते कभी सर्किट हाउस में नहीं ठहरते बल्कि रात में किसी गरीब की झोपड़ी में रात गुजारते थे. इसी तरह कर्पूरी की सादगी के किस्से भी काफी मशहूर हैं. उनके अंतिम दिनों तक साथ रहने वाले निहोरा प्रसाद कहते हैं, “जब बाबू जी विरोधी दल के नेता थे तो उन्होंने सुबह-सुबह मुझे बुलाया और मेरी मोटरसाइकिल पर सवार होकर उन विदेशी पत्रकारों से मिलने चले गये जिन्हें उन्होंने एक होटल में ठहराया था. इस दौरान रास्ते भर लोग उन्हें अचरज भरी निगाहों से देखते रहे.”
कर्पूरी ठाकुर ने भले ही मुंगेरी लाल कमीशन की सिफारिशों को लागू कर पिछड़ों को पहली बार नौकरियों में आरक्षण दिया और समाज के एक हिस्से में नायक की हैसियत पा गये लेकिन उनके इस कदम का समाज के एक हिस्से ने काफी आलोचना भी की. इन आलोचकों का मानना था कि नौकरियों में आरक्षण देने से वास्तविक प्रतिभा के साथ इंसाफ नहीं हो सकेगा. इस फैसले के खिलाफ आनदोलन भी चला. कई लोग मानते हैं कि आरक्षण लागू करने के इस फैसलने के बाद बिहार में अगड़ों और पिछड़ों का स्पष्ट राजनीतिक और सामाजिक विभाजन तभी से शुरू हुआ.
कर्पूरी ठाकुर के राजनीतिक और सामाजिक योगदान पर कुछ विरोधास होना स्वभाविक है पर उनके महत्वपूर्ण योगदान का ही परिणाम है कि बिहार सरकार ने 2008 में विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर जननायक को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग तक कर दी.इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डाट इन