Sunday, 24 March 2013






धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों में पली बढ़ी है नवोदित युवा शयारा अंजलि कौल "अदा", अंजलि छोटे परदे पर अभिनय के लिए भी जानी जाती है इसके अलावा गायकी, बैली डांसिंग, डोकुमेंत्री निर्देशन तथा कश्मीरियत के लिए भी काम करती रही है.अभी हाल ही में दिल्ली में एक मुशयारा में शिरकत करने आई अंजलि "अदा" से बात की हमारे दिल्ली ब्यूरो प्रमुख अमित कुमार ने पेश है प्रमुख अंश :- प्रश्न : अंजलि शायरी में आप संघर्ष कर रहीं है इसके अलावा कुछ और करती है आप ? अंजलि अदा : देखिये शेरों -शायरी के अलावा भी बहुत कुछ है जिसमे मैंने योगदान दिया है मैंने ५० से अधिक टीवी सीरियल में काम किया है इनमे प्रमुख है : सरफ़रोश, जज्बा,पिंजरे के पंछी,उमंग टेली फिल्म अमातव, लौट आओ , हम साया इत्यादि. डांसिंग शो भी देश के साथ साथ विदेशों में भी की है. प्रश्न : आपकी शयारी की कोई संग्रह उपलब्ध है ? अंजलि अदा : जी हाँ, सूफी शयारी की किताब "तेरे इश्क में" जो अभी प्रेस में है कुछ ही दिनों बाद ये मार्केट में उपलब्द होगा. प्रश्न : एक प्रशन जो हमारे पाठक भी आप से जानना चाहते होंगे की कश्मीरी पंडित यूवती कैसे उर्दू शेरो -शयारी की तरफ आकर्षित हुई ? अंजलि अदा : देखिये कश्मीर का एक अपना संस्कृति है, एक सूफी आवोहवा है उस कश्मीरियत माहौल ने मुझे शेरों शायरी की तरफ आकर्षित किया. प्रश्न : अभी आपने मशहूर शायर मंजर भोपाली के साथ स्टेज साझा किया है, कैसा रहा मंजर साहब के साथ का अनुभव ? अंजलि अदा : मंजर भोपाली साहब शेरों शायरी की दुनिया के महान शक्शियत है इनके साथ काम करने का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा. मंजर साहब पिछले चालीस साल से शेरों शयारी से आम लोगों का मनरंजन कर रहें हैं तथा शायरी के माध्यम से गंभीर मुद्दे उठाते रहें है. मंजर साहब बहुत ही खुशमिजाज इंसान है उम्मीद करती हूँ की भविष्य में फिर से मंजर साहब के साथ काम करने का मौका मिलेगा. प्रश्न : कुछ ऐसा जो आपने कश्मीर की वादी की शान्ति और संस्कृति को बचाने के लिए किया हो ? अंजलि अदा : मैं kashmiriyat preservation foundation की महासचिव हूँ. हम कोसिस करते हैं की घाटी में रह रहें तथा विश्व के किसी भी कोने में रह रहे कश्मीरी अपनी सभ्यता और संस्कृति से ना कटें. कश्मीर वादी की जो सभ्यता है वो अपने आप में अनोखी है यंहा की संस्कृति किसी धर्म और जाति से ऊपर है इसको आप गंगा जमुनी संस्कृति का नाम दे सकते है. और इसके अलावा हम आपसी सद्भाव के लिए समय समय पर कार्यकर्म आयोजित करते रहते है. प्रश्न : नब्बे के दशक में जब आतंक कश्मीर वादी में पनप रहा था तब घाटी से कश्मीरी पंडित अपने ही घर से आतंकियों द्वारा खदेड़ दिए गए, वो अपने ही देश में शरणार्थी की स्थिति में हैं. लेकिन आप जैसे कुछ परिवार है जो तमाम परेशानी के वाबजूद घाटी में जमे हुए हैं इसके पीछे क्या कारण है ? अंजलि अदा : मैंने अपनी आँखों से वादी में आतंक को पनपते हुए देखा है उस समय मैं स्कूल की छात्रा थी और जंहा तक मैं मानती हूँ इस तरह के किसी भी घटना में आम कश्मीरी का कोई हाथ नहीं था. कुछ लोग जो घाटी को आशान्त देखना चाहते थे उन्होंने इस तरह की घटना को अंजाम दिया, उन्होंने लोगों को डराया धमकाया घर के बाहर पोस्टर चिपकाये लेकिन इस तरह की घटना को हम सिर्फ आतंकी घटना के तौर पर देखते है इस से आम लोगों का कोई लेना देना नहीं था. घाटी के किसी भी घर में आप जाएँ चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय का घर हो उस घर ने कम से कम अपना एक सदस्य जरूर खोया है. आम कश्मीरी पहले भी भाईचारे के साथ रहते थे अब भी है कश्मीरी अमन पसंद होते हैं. हम कश्मीर में अभी तक इस लिए जमे है की हमारी जड़े कश्मीर की वादियों से गहरी जुड़ी है जिसे कोई नहीं हिला सकता. अगर आप अपने जड़ों से जुड़े है तो कोई भी ताकत आपकों आपकी मिटटी से बेदखल नहीं कर सकता. प्रश्न : कश्मीर में जब आतंकवादी घटना अपने चरम पर थी तब आपने क्या अपने कार्यकर्म को घाटी में बंद कर दिया था ? अंजलि अदा : नहीं बिलकुल नहीं जब वादी में आतंकी घटना बढ़ गई और आपसी सद्भव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाने लगा तब मैं बिना किसी डर और झिझक के घाटी में अपने कार्यकर्म करती रही तथा अपने शो के माध्यम से लोगों में शान्ति और सद्भाव का सन्देश देती रही. प्रश्न : कभी अपने पडोसी मुल्क में भी कोई शो आपने किया है ? अंजलि अदा : हाँ मैंने अपने शो के सिलसिले में पडोसी मुल्क पाकिस्तान की यात्रा की है. और मैं आजादी के बाद की पहली कश्मीरी पंडित महिला हूँ जिसने लाहौर की यात्रा किया है तथा अपना शो सूफी संगीत तथा डांस का परफोर्मेंस दिया है . प्रश्न : कुछ अपने पति धनञ्जय कौल के बारे में बताएं ? अंजलि अदा :मेरे पति धनञ्जय कौल सूफी ग़ज़ल तथा शाश्त्रीय संगीत के गायक है. उन्होंने अपनी संगीत की शिक्षा बनारस की मशहूर ठुमरी गायिका श्रीमती निर्मला अरुण( फिल्म अभिनेता गोविंदा की माँ) से ली है. प्रश्न : आप फुर्सत के क्षणों में क्या करती है ? अंजलि अदा :मुझे फुर्सत के क्षणों में संगीत के आलावा होर्से राइडिंग तथा डांसिंग करना अच्छा लगता है. प्रश्न : आप अपने भाषा ज्ञान के बारे में बातयें, किस किस भाषाओं में आप लिख और बोल सकती हैं ? अंजलि अदा : डोगरी और कश्मीरी मेरी अपनी भाषा है इसके अलावा अंगरेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और बंगाली में अच्छी तरह से बोल और लिख सकती हूँ. प्रश्न : चलते चलते कश्मीर में के बारे में कुछ युवाओं को सन्देश देना चाहेंगी ? अंजलि अदा : कश्मीर में अभी बहुत ही अच्छा माहौल है. सरकार अच्छा काम कर रही है. बहुत सारी योजनायें हैं जो कश्मीरी अल्प्शंख्य्कों को ध्यान में रख कर चलाया जा रहा है. कश्मीर अपने पुराने दिनों में लौट रहा है. पर्यटन के हिसाब से अनुकूल माहौल है. यूवाओं से अपील है की कश्मीर की शान्ति में योगदान दें.

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