डेयरी विकास कार्यक्रम के लिए 703 करोड़ रुपये की योजना
केंद्र
सरकार राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड) के माध्यम से
राज्यों में डेयरी विकास कार्यक्रम के लिए 703 करोड़ रुपये की योजना
कार्यान्वित कर रही है। पिछले तीन वर्षों में इस कार्यक्रम के लिए जारी
की गई धनराशि में से बाकी बची धनराशि 150 करोड़ रुपये 12वीं पंचवर्षीय
योजना की शेष अवधि में खर्च की जाएगी। यह जानकारी आज कृषि एवं खाद्य
प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री डा. चरणदास महंत ने लोकसभा में एक
लिखित उत्तर में दी।
उन्होंने बताया कि डेयरी उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत दुग्ध उत्पादों के लिए वांछित उपकरणों की खरीद हेतु 25 प्रतिशत और अधिकतम तीन लाख रुपये की राजकीय सहायता दी जाती है। अजा/अजजा के किसानों के लिए यह धनराशि 37.33 प्रतिशत और अधिकतम चार लाख रुपये है। यह एक ऋण आधारित केंद्रीय योजना है इसलिए राजकीय सहायता ऋण के भुगतान के अंत में दी जाती है।
श्री महंत ने बताया कि पर्वतीय और पिछड़े जिलों में ‘सघन डेयरी विकास कार्यक्रम’ के नाम से एक और केंद्र प्रायोजित योजना लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत उन जिलों को भी सहायता प्रदान की जाती है जिन्हें शत-प्रतिशत अनुदान वाले ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के अंतर्गत 50 लाख से कम धनराशि मिल पायी थी।
उन्होंने बताया कि डेयरी उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत दुग्ध उत्पादों के लिए वांछित उपकरणों की खरीद हेतु 25 प्रतिशत और अधिकतम तीन लाख रुपये की राजकीय सहायता दी जाती है। अजा/अजजा के किसानों के लिए यह धनराशि 37.33 प्रतिशत और अधिकतम चार लाख रुपये है। यह एक ऋण आधारित केंद्रीय योजना है इसलिए राजकीय सहायता ऋण के भुगतान के अंत में दी जाती है।
श्री महंत ने बताया कि पर्वतीय और पिछड़े जिलों में ‘सघन डेयरी विकास कार्यक्रम’ के नाम से एक और केंद्र प्रायोजित योजना लागू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत उन जिलों को भी सहायता प्रदान की जाती है जिन्हें शत-प्रतिशत अनुदान वाले ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के अंतर्गत 50 लाख से कम धनराशि मिल पायी थी।
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